मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठी नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता बीते आठ दिनों से मेधा पाटकर सरदार सरोवर बांध क्षेत्र के 40 हजार से ज्यादा प्रभावितों के लिए उचित पुनर्वास की मांग को लेकर उपवास पर हैं। अन्य 11 लोग भी इस पहल में उनका साथ दे रहे हैं।
बांध का गेट बीते जून 17 को बंद कर दिया गया था, जिसके चलते बांध का पानी आसपास के प्लेन एरिया की तरफ बढ़ चुका है। एम सुधा जो कि इस विरोध प्रदर्शन से जुड़ी हुई हैं उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि 'यह जमीन बेहद ही उपजाऊ है। अपनी जमीन को बर्बाद होते देखना यहां रहने वाले लोगों के लिए यह बड़ा ही कष्टकारी है।'
उन्होंने कहा 'इन जमीनों पर किसानों ने फसलें उगाई हैं लेकिन जानवर फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। यहां किसान अपनी फसलों को भारी नुकसान होते देख रहे हैं। सरकार बड़े स्तर पर यहां जमीन की घपलेबाजी कर रही है।'
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को फैसले सुनाया था कि प्रभावितों को 31 जुलाई तक शिफ्ट करने किया जाए।
पजबकि कोर्ट ने शर्तों के साथ काम बढ़ाने को कहा था। जिसके मुताबिक सरकार को प्रभावितों के पुनर्वास का पूरा इंतजाम करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
मेधा पाटकर के उपवास की वजह प्रभावितों के लिए टीनशेड बनाकर छोड़ दिए हैं और 40 हजार आबादी को उनमें शिफ्ट होने को कहा जा रहा है। जो उनमें शिफ्ट नहीं होना चाहते, उन्हें किराए के मकान लेने का कह दिया है।'