मध्य प्रदेश में इन दिनों पहली बार कोई जज न्याय के लिए हाईकोर्ट के सामने धरने पर बैठा है। एडीजे आरके श्रीवास का आरोप है कि विगत 15 माह में उनके चार तबादले हो चुके हैं। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और रजिस्ट्रार जनरल को अपनी पीड़ा से अवगत कराने के बावजूद जब कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो नौकरी दांव पर लगाकर यह कदम उठाना पड़ा।
बुधवार को श्रीवास के धरने का दूसरा दिन था। उनका कहना है कि सवा साल के भीतर उनके चार तबादले हुए हैं। पहला ट्रांसफर 11 अप्रैल 2016 को धार से शहडोल, इसके बाद सिहोरा, जबलपुर हाईकोर्ट और नीमच ट्रांसफर किया गया।
इन तबादलों से परिवार परेशान हो चुका है। यह स्थानांतरण नीति के भी खिलाफ है। उनका आरोप है कि तबादलों में भाई भतीजावाद चल रहा है। मैं एक जज हूं और मुझे भी न्याय चाहिए। अगर न्याय नहीं मिला तो अनशन करूंगा।
इस बीच हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने बुधवार को एडीजे श्रीवास के इस कदम को अनुशासनहीनता बताया और स्पष्ट किया कि 17 साल की नौकरी में श्रीवास 15 साल गृह जिले में रहे हैं।