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जानिए, कैसे व्यापमं घोटाले में एक एक कर दम तोड़ते गए संदिग्ध

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व्यापमं घोटाले में 24 घंटे के अंदर जान गंवाने वाले टीवी चैनल के पत्रकार अक्षय सिंह और जबलपुर मेडिकल कालेज के डीन डा. अरुण शर्मा की मौत बेशक पहेली लग रही हो लेकिन ये कोई पहला अवसर नहीं है जब इस तरह लोग एक एक कर मौत की नींद सो गए।
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ऐसे लोगों की लंबी फेहरिस्त है जो घर से जल्द लौटकर आने के लिए कहकर निकले लेकिन आज तक वापिस नहीं लौटे। मध्यप्रदेश का व्यापमं घोटाला अब ऐसा खूनी रुख अख्तियार कर चुका है कि जो कोई भी इसके संपर्क में आता है वो इतिहास बनकर इसकी जांच की फाइलों में दफन हो जाता है।

अंग्रेजी अखबार हिंदूस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार विजय सिंह पटेल की उम्र उस समय मात्र 35 साल थी जब वे बीते अप्रैल में छत्तीसगढ़ के होटल में मृत पाए गए थे। यह जगह वहां से 27 किलोमीटर दूर थी जहां वे अपनी पत्नी के साथ छुट्टियां बिताने गए थे। उनकी मौत आज भी एक पहेली बनी हुई है।
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हफ्तेभर पहले भी हुई थी आरोपियों की मौत

नम्रता दामोर एक जवान लड़की थी। एमबीबीएस की छात्रा नम्रता उस समय उम्र के बीसवें दौर में चल रही थी जब साल 2012 में उसकी लाश उज्जैन के रेलवे ट्रैक किनारे पड़ी मिली। पुलिस ने डॉक्टरों की रिपोर्ट के बाद उसकी मौत को आत्महत्या करार दे दिया।

हालांकि नम्रता के पिता आज तक यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली। गौरतलबब है कि शनिवार को संदिग्‍ध रूप से मौत के मुंह में समाने वाले टीवी चैनल के पत्रकार अक्षय सिंह नम्रता दामोर की मौत पर स्टोरी करने ही झबुआ गए थे जहां वे खुद एक कहानी बनकर रह गए।

पटेल और नम्रता तो बस जिक्र भर हैं मध्यप्रदेश के उस कुख्यात व्यापमं घोटाले के जिसें शिक्षक, छात्र, नौकरी करने वाले लोग, सरकारी अधिकारी, राजनेता और पुलिस सबकी मिलीभगत है। ऐसे लोगों की संख्या दर्जनों में हैं जो व्यापमं घोटाले में कैसी भी जानकारी रखने के कारण एक एक कर मौत की नींद सो गए।

मरने वालों में ज्यादातर मेडिकल से जुड़े लोग

नम्रता दामोर जो झबुआ ‌जिले से थी उसके बारे में बताया जाता है कि उसका संबंध व्यापमं घोटाले के मास्टरमाइंड जगदीश सागर से था जो इस समय जेल में है। नम्रता दामोर के परिजन बताते हैं कि अगर वह आत्महत्या ही करना चाहती थी तो वह ट्रेन का टिकट खरीदने की जहमत क्यों उठाएगी और क्यों वो इंदौर से उज्जैन तक का सफर ट्रेन से तय करेगी।

इसी तरह एक अन्य मेडिकल छात्र ज्ञान सिंह की मौत भी अभी तक पहेली बनी हुई है। पुलिस के अनुसार 23 वर्षीय ज्ञान सिंह की मौत किसी रसायन को पीने से हुई थी, हालांकि इस दावे को उसके परिवार वालों ने खारिज कर दिया है।
 
घोटाले के ही एक और सं‌दिग्‍ध अमित सागर जो एक वेटनरी स्टूडेंट थे उनकी मौत भी आज तक अनसुलझी कहानी बनी हुई है। 27 साल के सागर बीते फरवरी में घर से मार्निंग वॉक के लिए निकले थे। बाद में उनका शव एक नहर में तैर‌ता मिला।
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मरने वालों में अधिकतर ने संदिग्‍ध हालात में की आत्महत्या

मेडिकल के ही छात्र ललित कुमार गोलारिया और रामेन्द्र सिंह भदौरिया के परिजन भी बताते हैं कि उनके बच्चे व्यापमं घोटाले के सूत्रधारों का शिकार बन गए। बताया जाता है कि गोलारिया का शव मुरैना के एक पुल के नीचे मिला था जबकि भदौरिया ने अपने घर में ही आत्महत्या कर ली थी।

इन दोनों पर पैसे लेकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने का आरोप था। हालांकि पुलिस दावा करती है कि भदौरिया की मौत मौहब्बत में नाकाम होने के कारण हुई लेकिन परिजन इस दावे को खारिज करते हैं। उसके पिता कहते हैं कि उसके बेटे पर इतना अधिक दबाव बनाया गया कि उसे आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा।

मामले में विपक्षी दल कांग्रेस आरोप लगाती है कि पुलिस व्यापमं से जुड़े और जान गंवाने वाले लोगो के मामले को काफी हल्के में लेती है और उनकी जांच भी सही से नहीं की जाती।
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