मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा हुई। कांग्रेस ने पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण के मसले पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण पर रोक लगाई है।
मध्य प्रदेश में पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पंचायत चुनाव OBC आरक्षण के बिना नहीं होंगे। इसके लिए सरकार कोर्ट जाएगी और केंद्र सरकार भी राज्य को सहयोग करेगी।
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मध्य प्रदेश विधानसभा के शीत कालीन सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के स्थगन प्रस्ताव पर पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण पर बहस हुई। इस दौरान दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने एक-दूसरे को घेरने की कोशिश की। चर्चा का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले तीन दिन से वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ-साथ कानून विशेषज्ञों से चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि OBC कल्याण के लिए राज्य सरकार ने कभी भी समझौता नहीं किया है। 8800 पदों पर भर्ती निकाली, जिस पर 27% आरक्षण OBC को दिया गया है।
कांग्रेस ने सदन में मांग की है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी संस्थाओं में भी OBC के लिए आरक्षण लागू होना चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार ये प्रस्ताव विधानसभा में पारित कर केंद्र सरकार को भेजें। इससे पहले मुख्यमंत्री ने भी स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा करने पर सहमति जताई थी। चर्चा के दौरान राज्य के नगरीय विकास और आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने नियम, प्रक्रिया के तहत पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी की थी। कांग्रेस ने ही पंचायत चुनावों को निरस्त कराने के लिए कोर्ट की शरण ली थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने OBC रिजर्वेशन पर रोक लगा दी है तो इसकी जिम्मेदार सिर्फ कांग्रेस है। वहीं, पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कमलेश्वर पटेल कहा है कि हम चुनाव के विरोध में नहीं हैं। चुनाव प्रक्रिया में आरक्षण रोटेशन में अनियमितताओं, विसंगतियों को सुधारने के लिए कांग्रेस कोर्ट में गई थी। भाजपा इस मुद्दे पर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
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कमलनाथ बोले- आपकी आत्मा साथ हो तो कल चलते हैं कोर्ट में...
सदन में नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि मैंने कई बरसों तक लोकसभा में बहस की है। इस सदन का अनुभव बेहद कम है। यहां पर कहा गया कि कोर्ट की प्रोसिडिंग है। रिट पेटिशन की भी बात हुई। लेकिन अभी तीन बातें बाकी हैं। सीमांकन, रोटेशन और आरक्षण पर बात चल रही है। कोर्ट में विवेक तनखा के साथ राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के वकील भी थे। आपके वकील कोर्ट में चुप रहे। वे चाहते तो कोर्ट की टिप्पणी पर अपना पक्ष रख सकते थे। आप चाहते तो दूसरे दिन भी कोर्ट जा सकते थे। तब भी आप चुप ही रहे। मैं तो कहता हूं कि आप OBC के हितैषी हैं तो आप और हम एक साथ कोर्ट चलते हैं। जब दोनों कोर्ट चलते हैं, तो कौन-सा कोर्ट होगा जहां निष्कर्ष नहीं निकलेगा। आपकी आत्मा का साथ हो तो कल ही चलते हैं कोर्ट में।