सार
गीतकार मनोज मुंतशिर ने मंच से शहीदों की याद में कई ओजस्वी कविताएं पढ़ीं। उन्होंने कहा कि शहीदों का कर्ज कोई नहीं उतार सकता शहीद का सम्मान एक दिन नहीं, हर दिन होना चाहिए। एक शहीद की मां अपने बेटे पर गर्व करती है तो वैसे ही हर भारतवासी को शहीद और उसके परिवार पर गर्व करना चाहिए।
कार्यक्रम में शहीदों के परिजनों का किया गया सम्मान
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श्रवणोदय तीर्थ खजुराहो में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 'विरोदय सम्मान' समारोह आयोजित किया गया। जहां आचार्य श्री विद्यासागर के शिष्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज के सानिध्य में 30 से ज्यादा शहीद सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया। इस दौरान सुप्रसिद्ध लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर ने अपनी प्रस्तुति से समा बांध दिया।
देश प्रेम और भारतीयता का अलख जगाने के लिए मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ने लोगों को उनके कर्तव्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु बनेगा जब हम अपनी भारतीयता को समझेंगे। उन्होंने विदेशी वस्तुओं का त्याग और बहिष्कार करने के लिए मंच से आह्वान किया।
सैनिक परिवारों के सदस्य भावुक हुए
उन्होंने अपने देश के खान-पान पहनावा के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया। हमारे देश को बचाने के लिए वीरगति को प्राप्त हुए शहीदों के परिवारों को हर हाल में सम्मानित और संरक्षण देने की अपील की। उन्होंने कहा कि शहीदों और उनके परिवारों का कर्ज हमें मिलकर चुकाना है। समारोह में कई सैनिक और शहीद सैनिकों के परिवार के सदस्य सम्मानित हुए और सम्मान के समय भावुक हो गए।
शहीदों का कर्ज कोई नहीं उतार सकता : मुंतशिर
गीतकार मनोज मुंतशिर ने मंच से शहीदों की याद में कई ओजस्वी कविताएं पढ़ीं। उन्होंने कहा कि शहीदों का कर्ज कोई नहीं उतार सकता शहीद का सम्मान एक दिन नहीं, हर दिन होना चाहिए। एक शहीद की मां अपने बेटे पर गर्व करती है तो वैसे ही हर भारतवासी को शहीद और उसके परिवार पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने अपनी पंक्तियों में मां, मिट्टी, पिता और शहीद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनके जैसा दुनिया में कोई दूसरा हो ही नहीं सकता।