राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध सरकारी हमीदिया अस्पताल में जरूरी दवा और सामान की सप्लाई नहीं होने से किडनी ट्रांसप्लांट अटक गया है। इससे अस्पताल में ऑपरेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वालों की मुश्किलें बढ़ गई है। हद तो यह है कि एक दंपत्ति की ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी जांच के बाद ऑपरेशन के लिए तय समयसीमा भी खत्म हो गई है। इधर जिम्मेदारों का कहना है कि हमने जरूरी ड्रग्स और सामान के लिए टेंडर किए है। जल्द सप्लाई होगी।
हमीदिया अस्पताल में एक व्यक्ति को उनकी पत्नी किडनी डोनेट कर रही है। दोनों की ऑपरेशन के लिए जरूरी जांच की गई, जिसमें दोनों ऑपरेशन के लिए फिट पाए गए। इसके बाद आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल को ऑपरेशन के लिए जरूरी दवा और सामान की लिस्ट भेजी गई, लेकिन अब तक यह सामान ही नहीं मिल पाया है। दो माह से अधिक समय से दंपत्ति का किडनी ट्रांसप्लांट ही नहीं हो पा रहा है।
यह भी बताया जा रहा कारण
डोनर और रिसीवर पति-पत्नी है। दोनों के जिन अलग होते है। इसके लिए ऑपरेशन के लिए एक ड्रग्स की जरूरत पड़ती है, जो काफी महंगी होती है। इसकी खरीदी को लेकर ही मामला फंसा हुआ है। जिसके चलते अस्पताल में वेटिंग और ऑपरेशन के लिए तैयार मरीज और परिजन परेशान हो रहे है।
3 ट्रांसप्लांट, 35 वेटिंग में
हमीदिया अस्पताल में सितंबर 2021 में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हुआ था। उस समय सरकारी अस्पताल में गरीबों को आयुष्मान से मुफ्त और गैर आयुष्मान कार्डधारियों को सस्ता इलाज उपलब्ध कराने का दावा किया गया था। अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए 35 से अधिक आवेदन मिले है। इसके बावजूद अब तक सिर्फ 3 किडनी ट्रांसप्लांट ही हुए है।
प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल
गांधी मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध हमीदिया किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने वाला प्रदेश का पहला अस्पताल है। यहां सुविधा शुरू करते समय गरीबों को सस्ता और आयुष्मान से नि:शुल्क इलाज का दावा किया गया, लेकन ऑपरेशन की रफ्तार गरीबों के लिए सुविधा की जगह प्रताड़ना ज्यादा दिख रही है। इसके बाद जबलपुर के सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज में भी किडनी ट्रांसप्लांट शुरू किया गया है।
क्या बोले जिम्मेदार-
टेंडर कर दिया हैं
हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक आशीष गोहिया ने कहा कि जरूरी ड्रग्स के लिए टेंडर किए गए है। इसकी सप्लाई होते हुए ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
जानकारी लेता हूं
भोपाल कमिश्नर माल सिंह भयड़िया ने कहा कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी लेता हूं। मरीजों के हित में निर्णय लिया जाएगा।