फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP News: उदासीनता का शिकार हो रहीं पांडवकालीन लखबरिया की गुफाएं, जानें इतिहास की इस धरोहर के बारे में सबकुछ

Sun, 17 Dec 2023 09:03 PM IST
दिनेश शर्मा सादिक खान, शहडोल

सार

शहडोल जिला मुख्यालय से मात्र 30 से 35 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत लखबरिया में पांडवकालीन पौराणिक स्थान मौजूद है। बताया जाता है कि पांडव जंगल-जंगल भटकते यहां आए थे और अपने कष्ट भरे अज्ञातवास के कुछ महीने भी यहां गुजारे थे।
विज्ञापन
लखबरिया गुफाएं अनदेखी का शिकार हो रही हैैं। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में स्थित पांडवकालीन लखबरिया गुफाएं अब धीरे-धीरे भुलाई जा रही हैं। उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। करीब तीन साल पहले पुरातत्व विभाग की इस पर नजर पड़ी तो दिल्ली-भोपाल से टीम आई थी, लेकिन वह भी औपचारिकता निभाकर लौट गई। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद के सभी परिणाम आज भी शून्य हैं।
विज्ञापन


बता दें कि शहडोल जिला मुख्यालय से मात्र 30 से 35 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत लखबरिया में पांडवकालीन पौराणिक स्थान मौजूद है। बताया जाता है कि पांडव जंगल-जंगल भटकते यहां आए थे और अपने कष्ट भरे अज्ञातवास के कुछ महीने भी यहां गुजारे थे। तब से लेकर आज तक लखबरिया लोक आस्था का केंद्र बना हुआ है। पुराने लोग कहते हैं कि लखवरिया की गुफाएं अंदर ही अंदर अमरकंटक और इलाहाबाद तक जाती थीं। 

ऐसे पड़ा नाम
मान्यता है कि इन गुफाओं की खोज वर्षों पहले लखबरिया बाई ने की थी। उन्हीं के नाम पर इस पांडव कालीन पौराणिक स्थान का नाम लखबरिया पड़ा। यहां कई छोटे-छोटे मंदिर भी हैं, जो पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं। वर्तमान में गुफाएं धरती में दब चुकी हैं, ग्रामीण बताते हैं कि गुफाओं के 8 से 10 किलोमीटर की परिधि में कोयला खनन आदि के लिए ब्लास्टिंग होते रहे हैं जिसका प्रतिकूल असर भी कहीं न कहीं पड़ा है।
विज्ञापन


यह है वर्तमान स्थिति
लखबरिया धाम की वर्तमान स्थिति पर नजर डाली जाए तो यह देखने को मिलेगा कि मंदिर की दीवारों की बरसों से ना ही सफाई हुई और ना ही पुताई जिससे दीवार काई और मिट्टी से काली हो चुकी है। मंदिर और गुफाओं के मरम्मत के नाम पर सीमेंट और कांक्रीट का भरपूर इस्तेमाल किया गया, जिससे गुफाओं और मंदिरों ने अपना मूल स्वरूप खो दिया है। लखबरिया मंदिर ट्रस्ट के नाम की जमीनों में अवैध कब्जा हावी है। अतिक्रमण दिनोंदिन जारी है। मंदिर में स्थित शिवलिंग तथा गुफाओं के दीवार देख-रेख के अभाव में धीरे-धीरे क्षरित हो रहे हैं। मंदिर की सुंदरता निखारने वाले तालाब तमाम तरह की गंदगी से पटी पड़ी हैं। मंदिर के आसपास का पूरा क्षेत्र शाम होते ही शराबियों एवं जुआरियों के लिए शरण स्थली बन जाता है।

सावन में लगता है भक्तों का तांता
विगत कुछ वर्षों से सावन के महीने मे कांवड़ियों द्वारा अमरकंटक से नर्मदा का जल लाकर यहां बने शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। पूरे सावन महीने मे भक्तों का तांता लगा रहता है।

दिनोंदिन गुमनामी के साये में
बता दें कि मुख्य मंदिर गांव के एकांत जगह में होने से लखबरिया के बारे में अधिकांश लोगों को पता तक नहीं है। इससे मंदिर पर्यटकों की नजर से छिप गया है। स्थानीय लोगों से जानकारी प्राप्त हुई कि जिला प्रशासन बसंत पंचमी पर मंदिर प्रांगण में लगने वाले मेले की बोली के लिए मंदिर का सुध लेता है. बाकी समय इसे भुला दिया जाता है। इस पौराणिक धरोहर की रक्षा के साथ इसके प्रचार की भी जरूरत है। यहां पर्यटन स्थल के रूप मे जीर्णोद्धार हो जाने से लखबरिया का यह पौराणिक धरोहर आस-पास के गांव अरझुला, बन्डी, बेम्हौरी, गरफंदिया, बंगवार के तमाम स्थानीय लोगों को रोजगार के भी कई अवसर उपलब्ध कराएगा।

बताया जाता है कि बीते 3-4 वर्षों से अधिकारियों ने आवाजाही शुरू की है। बीते वर्ष तात्कालिक कमिश्नर राजीव शर्मा आए थे। उन्होंने मंदिर परिसर में मरम्मत के नाम पर हुए सीमेंट के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

नया प्रस्ताव तैयार करेंगे
शहडोल कलेक्टर वंदना वैद्य ने कहा कि इस संबंध में पुरातत्व विभाग से बात करके विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। पूर्व में कुछ काम हुए हैं। जल्द ही नया प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें