कांग्रेस नेता कमलनाथ (फाइल फोटो)
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को कहा कि जो भाजपा आज खुद को आदिवासी वर्ग का सबसे बड़ा हितेषी बता रही है, उसकी आदिवासी वर्ग के प्रति सोच व आदिवासी विरोधी मानसिकता अनुपूरक बजट से सामने आ गई है। द्वितीय अनुपूरक अनुदान 2021-22 में व्यय के लिए जारी अनुसूची में कुल 21,584 करोड़ रुपये में से जनजातीय कार्य के लिए मात्र 400 रुपये की राशि का प्रावधान कर शिवराज सरकार ने बता दिया है कि आदिवासी वर्ग के प्रति उनकी सोच क्या है? वह उनका कितना भला चाहती है? उनके उत्थान, हित व कल्याण के लिए वह कितनी गंभीर है? इस वर्ग के विकास के लिए उसकी सोच क्या है?
कमलनाथ ने कहा कि जो भाजपा सरकार सिर्फ चुनावों को देखते हुए आदिवासी वर्ग को लुभाने-साधने के लिए भोपाल के जंबूरी मैदान में जनजातीय गौरव दिवस मनाने के नाम पर 100 करोड़ रुपए लूटा देती है, वह जनजातीय कार्य के लिए अनुपूरक बजट में मात्र 400 रुपये की राशि का प्रावधान कर इस वर्ग के प्रति अपनी सोच को बया कर रही है। भाजपा को चुनावों को देखते हुए 18 वर्ष बाद आदिवासी वर्ग व उसके महानायकों की याद आ रही है। आज एक तरफ रानी कमलापति के नाम पर हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नामकरण किया गया है, वहीं मुख्यमंत्री के क्षेत्र में रानी कमलापति की आखिरी निशानी गिन्नौरगढ़ का किला अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। यह भाजपा की हकीकत है।
भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही कहती आ रही है कि यही भाजपा का दोहरा चरित्र है। वह कभी भी आदिवासी वर्ग का भला नहीं चाहती है। सिर्फ चुनावों को देखते हुए उसे आज आदिवासी वर्ग की याद आ रही है। जब से मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है, आदिवासी वर्ग पर उत्पीड़न और दमन की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। इसके गवाह हाल ही के एनसीआरबी की रिपोर्ट के आंकड़े हैं, जिसमें मध्यप्रदेश का नाम आदिवासी उत्पीड़न व अत्याचार की घटनाओं में देश में शीर्ष राज्य के रूप में सामने आया है।