विदिशा में हम्माल के बेटे ने पास की नीट परीक्षा।
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मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के लटेरी गांव में हम्माली करने वाले फरहत उल्लाह खान उर्फ कल्लू चाचा के बेटे अयान ने पहली ही कोशिश में NEET में सफलता हासिल की है। उसे 720 में से 611 अंक प्राप्त हुए हैं। अब वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है।
फरहत उल्लाह खान का कहना है कि अयान बचपन से ही पढ़ाई में तेज है। उसने कक्षा 10वीं में 97% और कक्षा 12वीं में 92% अंक हासिल किए थे। भोपाल में पढ़ाई की और पहली बार में ही NEET की परीक्षा में सफलता हासिल की। अयान सात भाई-बहनों में सबसे छोटा है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसके बाद भी उसके पिता ने उसे उसके सपनों में रंग भरने के लिए प्रेरित किया और सभी आवश्यक इंतजाम किए। दिन-रात मेहनत की। बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए बकरियां तक चराई। हम्माली कर एक-एक रुपया जोड़ा और अब अयान डॉक्टर बनने जा रहा है। अयान का एक भाई टेलर है। वहीं, अन्य भाई-बहन भी इतने पढ़े-लिखे नहीं है जितना पढ़ने का अयान ने सपना देखा। फरहत उल्लाह की आंखें भी अयान के बारे में बात करते हुए नम हो गई, जब उन्होंने बताया कि हमें मुख्यमंत्री की योजना से 30 हजार रुपये मिले थे। वह पैसा भी अयान की पढ़ाई पर खर्च कर दिया।
पिता के बिना मैं कुछ भी नहीं
अयान ने कहा कि उसके माता-पिता ने उसे काफी सपोर्ट किया है। पिता ने हम्माली की और फीस के लिए मुश्किल से पैसे जुटाए। जब कभी मैं नर्वस हुआ, मेरे पिता मेरे लिए ढाल बनकर खड़े रहे। मुझे हौंसला देते थे। वह कहते थे किसी बात पर तुम ध्यान न दो। सिर्फ पढ़ाई करो। आगे की पढ़ाई के लिए पापा ने ही मुझे भोपाल भेजा। मुझे लटेरी के ही सरकारी स्कूल के जनमेद सर ने भी काफी मदद की। मैं रोजाना छह घंटे पढ़ता था। सच्ची लगन और कड़ी मेहनत से सफलता जरूर मिलती है।
एमबीबीएस के बाद कार्डियो में स्पेशलाइजेशन
अयान का कहना है कि वह एमबीबीएस करने के बाद कार्डियो में स्पेशलाइजेशन करना चाहता है। डॉक्टर बनने के बाद उसकी ख्वाहिश पिताजी की हम्माली छुड़वाना है। उसका कहना है कि उन्होंने हमारे लिए काफी संघर्ष किया है। मैं चाहता हूं कि पापा और पूरा परिवार आर्थिक रूप से समृद्ध हों और सम्मान के साथ जीवन जीएं।