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MP: इंदौर में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पर संवाद, वक्ता बोले- एल्गोरिदम की गुलाम हो गई डिजिटल पत्रकारिता

Sun, 31 May 2026 07:27 PM IST
Sabahat Husain न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर आयोजित संवाद में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल पत्रकारिता एल्गोरिदम, टीआरपी और व्यूज की गुलाम होती जा रही है। 

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हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पर संवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने रविवार को इंदौर प्रेस क्लब सभागार में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल पत्रकारिता अब एल्गोरिदम की गुलाम होती जा रही है और पाठकों की वास्तविक पसंद पीछे छूट गई है। पत्रकारिता अब टीआरपी, व्यूज और ट्रेंड्स पर आधारित होती जा रही है, जो उसके पतन का कारण बन रही है।

वक्ताओं ने कहा कि कुंभ जैसे आयोजनों में मोनालिसा और ‘आईआईटी बाबा’ जैसे विषयों पर सबसे अधिक व्यूज़ आना यह सवाल खड़ा करता है कि समाज आखिर क्या देखना चाहता है। यदि समाज को उसकी पसंद के मुताबिक केवल वही परोसा जाएगा, तो वह उन्नति की बजाय पतन की ओर बढ़ेगा।

अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कर्णिक ने कहा कि पिछले ढाई दशक में पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदला है। तकनीक शेर की सवारी की तरह है, यदि आप उस पर सवार हैं तो वह आपकी गुलाम है, लेकिन यदि वह आप पर सवार हो जाए तो वही तकनीक आपको निगल सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि आपके पास हुनर है तो आईटी आपके लिए उपयोगी है, लेकिन यदि आप केवल एआई के भरोसे हैं तो यह एक ऐसा गुब्बारा है, जो कभी भी फूट सकता है। उन्होंने कहा कि एआई केवल पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि मानवता के लिए भी चुनौती बन सकता है। इसके उपयोग को लेकर सजग रहने की जरूरत है और इसका विध्वंसकारी इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

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वहीं वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार ने कहा कि यदि तकनीक को बोझ समझा गया तो इस दौर में पिछड़ना तय है। पत्रकारिता में टिके रहने के लिए खुद को लगातार अपडेट करना जरूरी है। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी ने कहा कि एआई का दौर पत्रकारिता के लिए कई मायनों में फायदेमंद है। इस तकनीक ने काम को आसान बनाया है। समय के साथ बदलना और उसके साथ चलना जरूरी है।

पत्रकार भुवनेश सेंगर ने कहा कि पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा में कई बड़े बदलाव आए हैं। पहले पत्रकारिता समाज सुधार, देश की आजादी और जनजागरण का माध्यम थी, लेकिन अब कुतर्कों पर आधारित पत्रकारिता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एआई से ज्यादा जरूरी अपनी प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को मजबूत करना है। अब रिपोर्टर नाम की संस्था को बचाने की जरूरत है। पत्रकारिता अब एक इवेंट में बदलती जा रही है और ‘तुमको जो हो पसंद वही बात करेंगे’ की तर्ज पर चल रही है।

कार्यक्रम में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष अर्पण जैन अविरल ने विषय प्रस्तावना रखी। इस अवसर पर ‘ई साहित्य ग्राम डॉट कॉम’ वेबसाइट का शुभारंभ भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन अंशुल व्यास ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कीर्ति मेहता ने किया।

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