बच्चों के मामा बन चुके शिवराज सिंह चौहान के मध्यप्रदेश में ही बच्चियां असुरक्षित हैं। टंट्या मामा समेत अन्य आदिवासियों को पूजने वाले मुख्यमंत्री के राज में आदिवासियों पर भी अत्याचार थम नहीं रहे। यह बात एनसीआरबी की नई रिपोर्ट में सामने आई है। भले ही यह मसला प्रशासनिक हो, कांग्रेस को मौका मिला तो प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने जनता से माफी मांगने की अपील कर दी। सियासत जारी है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की नई रिपोर्ट आई है। इसमें 2021 में अपराधिक घटनाओं को ब्योरा पेश किया गया है। इसके अनुसार प्रदेश में 2021 में नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के 3515 मामले दर्ज हुए। वहीं, देश में यह आंकड़े 33 हजार 36 है। प्रदेश में 2020 मे नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के मामले 3 हजार 259 थे। वहीं, 2021 में नाबालिग, बालिग और बुजुर्ग सभी को मिलाकर प्रदेश में दुष्कर्म के 6462 केस दर्ज हुए है। यह संख्या पिछले साल 5598 थी। बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामलों में पिछले साल भी मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे था।
आदिवासियों पर अत्याचार में भी आगे
प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ गंभीर अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। 2021 में एसटी/एससी वर्ग के तहत 2627 मामले दर्ज हुए हैं। यह मामले 2020 में 2401 थे।
आत्महत्या में तीसरे नंबर पर
प्रदेश आत्महत्या के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है। यहां पर 13,500 मामले सामने आए हैं। पहले नंबर पर 22,207 मामलों के साथ महाराष्ट्र, 18925 मामलों के साथ तमिलनाडु दूसरे स्थान पर है।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
एनसीआरबी के रिपोर्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि सरकार के दावों और सुशासन की पोल खुल गई है। प्रदेश में मासूमों से दुष्कर्म में देश अव्वल है। उस पर लगा यह दाग अभी भी बरकरार है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में औसतन हर 3 घंटे में एक मासूम बच्ची से दुष्कर्म की घटना घटती है। जो खुद को मामा कहलवाते हैं, यह उनकी सरकार की शर्मनाक वास्तविकता है।
शिवराज सरकार जनता से माफी मांगे
कमलनाथ ने कहा कि आदिवासी और दलितों पर अत्याचार में भी मध्य प्रदेश एक बार फिर देश में शीर्ष पर आया है। यह शिवराज सरकार के पिछले 16 वर्षों के विकास, सुशासन के दावों की हकीकत है। आज मध्य प्रदेश में कोई भी सुरक्षित नहीं है। कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सरकार को इस रिपोर्ट के बाद अपनी नाकामी स्वीकारते हुए अविलंब प्रदेश की जनता से, बहन-बेटियों से माफी मांगना चाहिए व जिम्मेदारों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करना चाहिए और प्रदेश के माथे पर वर्षों से लगे इस दाग को धोने के लिए कड़े कदम उठाना चाहिए।