मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मंगलवार को अवमानना याचिका को लेकर सागर आयुक्त मनोज कुमार शुक्ला को कारण बताओ नोटिस (शो कॉज नोटिस) जारी किया है। कोर्ट के आदेश के बावजूद सागर आयुक्त शुक्ला ने निर्धारित समय सीमा में अपील का निराकरण नहीं किया। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट के जस्टिस एमएस भटटी ने आयुक्त सागर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जिला कलेक्टर छतरपुर ने पुराने रिकॉर्ड पर की थी कार्रवाई
याचिकाकर्ता कल्लू लोधी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि अपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर कलेक्टर छतरपुर ने साल 2018 में उसके खिलाफ जिला बदल की कार्रवाई की थी। जिला कलेक्टर छतरपुर ने साल सितंबर 2022 में भी पूर्व के अपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर जिला बदल की कार्रवाई कर दी। इस दौरान उसने कोई अपराधिक गतिविधि नहीं की। जिला बदल की कार्रवाई के खिलाफ उसने संभागायुक्त सागर मुकेश कुमार शुक्ला के समक्ष अपील दायर की थी।
अदालत ने 15 दिनों अपील के निराकरण का दिया था आदेश
संभागायुक्त उसकी अपील पर सुनवाई नहीं करते हुए लंबित रखे हुए थे। इसके खिलाफ लोधी ने हाई कोर्ट में उक्त याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि छतरपुर कलेक्टर का आदेश संविधान की धारा 20 का उल्लंघन है। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संभागायुक्त सागर को 15 दिनों में अपील का निराकरण करने आदेश जारी किया था।
सागर आयुक्त ने कोर्ट के आदेश को किया नजरअंदाज
दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि संभागायुक्त सागर को हाई कोर्ट के आदेश से अवगत करवाते हुए त्वरित सुनवाई के लिए 26 दिसंबर 2022 को आवेदन भी पेश किया था। इसके बावजूद भी संभागायुक्त ने मामले का निराकरण नहीं किया। एकलपीठ ने हाई कोर्ट के आदेश की नाफरमानी को गंभीरता से लेते हुए संभागायुक्त सागर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पैरवी की।