दिल्ली और तेलंगाना के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने भी अपने विधायकों और मंत्रियों की तनख्वाह में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी कर दी है। सरकार ने विधायकों की तनख्वाह 71 हजार से बढ़ाकर एक लाख दस हजार रुपये प्रति महीना कर दी है।
यही नहीं मुख्यमंत्री की तनख्वाह भी 1.43 लाख से बढ़कर 2 लाख रुपये हो गई है। अपने पेट भरने का सत्ता का यह रवैया इसलिए सवाल खड़ा करता है कि क्योंकि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में सूखे और फसल बर्बादी के कारण अभी तक सैकड़ों किसान आत्महत्या कर चुके हैं, सरकार को उनकी सुध लेने की तो फुर्सत नहीं लेकिन उन्हीं किसानों की नुमाइंदगी करने वाले विधायकों पर जमकर दरियादिली दिखाई जा रही है।
मंगलवार को राज्य की कैबिनेट ने इस संबंध में प्रस्ताव भी पास कर दिया। मुख्यमंत्री और विधायकों के अलावा राज्य के मंत्रियों की तनख्वाह में भी बढ़ोत्तरी की गई है। उन्हें जहां पहले 1.20 लाख रुपये तनख्वाह मिलती थी वह बढ़कर अब 1.70 लाख रुपये प्रति महीना हो गई है।
राज्य कैबिनेट ने दी प्रस्ताव को मंजूरी
राज्य के विधायकों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और उनकी सरकार का यह पहला वाक्या नहीं है इससे पहले इस महीने की शुरूआत में उन्होंने घोषणा की थी कि विधायकों का विकास फंड में भी बढ़ाया जाएगा। इसे 80 लाख से बढ़ाकर दो करोड़ किया जाएगा, जिससे विधायक अपने अपने क्षेत्रों में ज्यादा विकास कार्य करा सकें।
बता दें कि इससे पहले दिल्ली और तेलंगाना में भी विधायकों की तनख्वाह में काफी बढ़ोत्तरी की गई है। तेलंगाना विधानसभा ने तो दो दिन पहले ही इस संबंध में बिल पास किया है जिसमें विधायकों की तनख्वाह 95 हजार से बढ़कर ढाई लाख रुपये हो गई है।
इसके साथ ही तेलंगाना के विधायक देश में सबसे ज्यादा तनख्वाह पाने वाले जनप्रतिनिधि बन गए हैं। राज्य में मुख्यमंत्री, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, मंत्रियों, विधानपरिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों सदनों में विपक्ष के नेता, विधायकों और विधानपरिषद सदस्यों की तनख्वाह में भी अच्छी खासी बढ़ोत्तरी की गई है।
इससे पहले कुछ ऐसा ही कारनामा दिल्ली सरकार भी कर चुकी है जिसने राज्य के विधायकों की तनख्वाह तीन गुना तक बढ़ाई थी।