मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान होगा। भोपाल की सात में से 6 सीटों पर प्रत्याशी उतारने के बाद भाजपा ने शनिवार को आखिरी दक्षिण पश्चिम सीट पर भी प्रत्याशी के नाम का एलान कर दिया। इसके साथ ही भोपाल की सातों सीट पर दोनों प्रमुख दल के उम्मीदवारों के नाम आने के बाद मुकाबला लॉक हो गया है। भगवान दास सबनानी को टिकट देकर भाजपा ने भोपाल के सिंधी वोटरों को साधने का दांव चला है। दरअसल कांग्रेस ने हुजूर विधानसभा सीट पर सिंधी प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी को टिकट दिया है। सबनानी का नाम भी हुजूर विधानसभा सीट पर चल रहा था, लेकिन भाजपा ने यहां पर अपने वर्तमान विधायक रामेश्वर शर्मा को ही प्रत्याशी बनाया है। सिंधी समाज के प्रत्याशी नहीं उतारने से भाजपा को भोपाल में नुकसान हो सकता था। इसलिए अब भाजपा ने दक्षिण पश्चिम सीट पर सबनानी को सीट देकर सिंधी वोटरों को साधने का दाव चला है।
भाजपा में भीतरघात को भी रोका
भगवान दास सबनानी संगठन की पंसद है। उनको संघ का भी सपोर्ट हैं। दक्षिण पश्चिम सीट पर भाजपा की तरफ से कई दावेदार थे। इसमें पूर्व मंत्री उमा शंकर गुप्ता, प्रदेश मंत्री राहुल कोठारी और भोपाल भाजपा जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी दावेदार थे। ऐसे में पार्टी कांग्रेस प्रत्याशी वर्तमान विधायक पीसी शर्मा के सामने उम्मीदवार को लेकर निर्णय नहीं ले पा रही थी। अब सबनानी को प्रत्याशी बना कर भाजपा ने पार्टी में भीतरघात होने से रोक लिया है।
सबनानी एक बार लड़ चुके चुनाव
भगवान दास सबनानी ने भाजपा से बागी होकर हुजूर विधानसभा से चुनाव लड़ा था। हालांकि उनको हार का सामना करना पड़ा। जानकारों का कहना है कि सबनानी को प्रत्याशी बनाकर कर पार्टी सिंधी बाहुल्य बैरागढ़ से हुजूर विधानसभा को भी साधने का प्रयास किया है। यहां पर 50 से 60 हजार सिंधी वोटर है। इस निर्णय के पीछे भाजपा का प्रयास सिंधी समाज की नाराजगी दूर करने भी बताया जा रहा है।
अधिकारी-कर्मचारी की संख्या अधिक
भोपाल दक्षिण-पश्चिम सीट पर अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या अधिक है। यहां पर सिंधी समाज का वोटर मात्र एक से डेढ़ हजार ही है। इस सीट पर पिछली बार कांग्रेस के पीसी शर्मा ने भाजपा के पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता को 6587 वोट से हराया था। इस बार पीसी शर्मा और भगवान दास सबनानी के बीच मुकाबला होगा।