धार में बाढ़ और बारिश से ग्रसित क्षेत्रों का सर्वे करेंगे मृत शिक्षक
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कई बार देखा या सुना होगा कि मृतकों के नाम पर राशि निकाली गई। ये भी सुना होगा कि फर्जी तरीके से मनरेगा में नाम जुड़ गया। पर पहली बार ऐसा हुआ है, जब किसी मृत सरकारी कर्मचारी को सर्वे के लिए चुना गया हो। शिक्षा विभाग की लापरवाही खुलकर सामने आई है।
अजब-गजब शिक्षा विभाग की कहानी
जानकारी के मुताबिक ऐसा ही माजरा धार जिले में देखने को मिला है। जहां सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसमें एक शिक्षक की तीस साल पहले ही मृत्यु हो जाने के बाद अब उनका नाम विगत दिनों बारिश से हुई तबाही की सर्वे दल की लिस्ट में डाल दिया गया। जिसको लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे है। लोगों ने कहा कि ऐसे में बाढ़ और बारिश से प्रभावित लोगों की खेती को लेकर हो रहे सर्वे में कितनी ईमानदारी बरती जाएगी।
मृत शिक्षक का नाम बाढ़ और बारिश से ग्रसित क्षेत्रों की सर्वे सूची में ड़ाला
जिले के टांडा क्षेत्र के ग्राम आम्बासोटी के रहने वाले शिक्षक जो टांडा के ही डोडवा नामक ग्राम के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाते थे। पांच जनवरी 2021 में बीमारी के चलते 50 वर्ष की उम्र में इनकी मृत्यु हो गई। जिसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो गया था। इसके बाद से उनका परिवार अपनी खेती और अन्य कामों में लग गया। वहीं, विगत दिनों धार जिले में हुई अत्यधिक बारिश से क्षेत्र सहित जिले भर में आम लोगों के साथ किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। जिसको लेकर प्रशासन ने सर्वे के आदेश जारी किए गए। टांडा कुक्षी क्षेत्र में भी सर्वे कार्य को लेकर प्रशासन ने तैयारी की और सर्वे को लेकर कई टीमें बनाई गई। जिसमें सर्वे टीम की जारी एक लिस्ट में मृत शिक्षक तेर सिंह मोरी का भी नाम जारी कर दिया गया। इस लिस्ट की जानकारी जब ग्राम आम्बासोटी के सरपंच अमर सिंह सोलंकी को लगी तो अपने गांव के मृत शिक्षक का नाम देखकर वे भी हैरान रह गए।
इसके बाद कुक्षी एसडीएम रमेश चंद्र खतेड़िया से बात की तो उन्होंने बताया कि सर्वे की लिस्ट के लिए नाम क्षेत्रीय शिक्षा विभाग अधिकारी की ओर से दिए गए हैं। भूल वस पुरानी लिस्ट वहां से जारी हो गई होगी। जिसको दिखाकर उसमें सुधार करवा लिया जाएगा। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर आम्बासोटी गांव के सरपंच ने प्रशासन की भूल पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि अगर अधिकारी ऐसी गलती कर रहे हैं तो सर्वे पर उनसे क्या उम्मीद की जाए और प्रभावित लोगों को न्याय भी दिलवा पाएंगे या नहीं, ऐसे में प्रशासन की कार्य शैली पर भी कई सारे सवाल खड़े होते हैं।