दलितों के अधिकारों और उनसे भेदभाव को लेकर बेशक देशभर में कितना हल्ला मचा हो लेकिन इसका कोई सार्थक परिणाम निकलता नहीं दिख रहा है। समाज के इस वंचित तबके को लेकर चल रही तमाम बहस के बीच ही उनसे भेदभाव और अत्याचारों की रोज नई खबरें सामने आ रही हैं।
ऐसा ही एक मामला सामने आया है मध्यप्रदेश के मुरैना का। जहां एक व्यक्ति को अपनी पत्नी की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार के लिए शमशान घाट में भी नहीं घुसने दिया गया।
मजबूरन उसे घर के बाहर ही पत्नी का अंतिम संस्कार करना पड़ा। मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार मामला मुरैना जिले के गढ़ी गांव का है। गांव निवासी दलित जाति का बबलू सूरत में काम करता है जबकि उसकी पत्नी बच्चों के साथ गांव में रहती है। बताया जाता है कि पत्नी लंबे समय से बीमार चल रही थी जिसका मंगलवार को निधन हो गया।