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शिवराज के राज में शमशान में नहीं घुस पाए दलित, घर पर किया अंतिम संस्कार

Fri, 12 Aug 2016 06:00 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : ANI
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दलितों के अधिकारों और उनसे भेदभाव को लेकर बेशक देशभर में कितना हल्ला मचा हो लेकिन इसका कोई सार्थक परिणाम निकलता नहीं दिख रहा है। समाज के इस वंचित तबके को लेकर चल रही तमाम बहस के बीच ही उनसे भेदभाव और अत्याचारों की रोज नई खबरें सामने आ रही हैं। 
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ऐसा ही एक मामला सामने आया है मध्यप्रदेश के मुरैना का। जहां एक व्यक्ति को अपनी पत्नी की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार के लिए शमशान घाट में भी नहीं घुसने दिया गया। 

मजबूरन उसे घर के बाहर ही पत्नी का अंतिम संस्कार करना पड़ा। मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। 

जानकारी के अनुसार मामला मुरैना जिले के गढ़ी गांव का है। गांव निवासी दलित जाति का बबलू सूरत में काम करता है जबकि उसकी पत्नी बच्चों के साथ गांव में रहती है। बताया जाता है कि पत्नी लंबे समय से बीमार चल रही थी जिसका मंगलवार को निधन हो गया। 
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दबंगों ने शमशान घाट में घुसने से रोका, घर के बाहर किया अंतिम संस्कार

- फोटो : ANI
सूचना मिलते ही बबलू सूरत से लौटा और बुधवार को पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के साथ उसका शव लेकर शमशान घाट के लिए चल दिया। बताया जाता है जैसे ही वह शमशान घाट में घुसने के लिए हुआ इसकी भनक गांव के दबंग जाति के लोगों को लग गई। 

वे तुरंत शमशान घाट पहुंचे और दलितों के अंदर प्रवेश करने पर आपत्ति जताई। बबलू ने उनकी लाख मिन्नत कर पत्नी का अंतिम संस्कार शमशान घाट में ही करने की बात कही लेकिन दबंगों का दिल नहीं पिघला। नतीजतन शमशान घाट के लिए चली शव यात्रा वापस घर के लिए लौट गई। 

इसके बाद बबलू और उसके परिजनों ने महिला का अंतिम संस्कार घर के बाहर ही एक खाली जगह पर कर दिया। वहीं इस घटना की सूचना जैसे ही मीडिया तक पहुंची तो हल्ला मच गया। खबर प्रशासन के कानों तक भी पहुंची। जिलाधिकारी ने मामले में जांच के आदेश दिए तो अधिकारी भागे भागे बबलू के घर पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि अभी तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
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