कटनी से भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी से डेढ़ करोड़ की ठगी मामले में गिरफ्तारियां हुई हैं।
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मध्यप्रदेश में सबसे रईस विधायकों में शुमार कटनी के विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक की फर्म से बुधवार को हुई करीब 1.5 करोड़ की साइबर ठगी ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया था। घटना की सूचना मिलते ही कटनी पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए तीन टीम गठित कर एमपी के विभिन्न जिलों समेत अन्य राज्यों में रवाना करते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की। इसमें अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही इस साइबर फ्रॉड से जुड़े कई बैंक अकाउंट फ्रीज करते हुए करीब 28 लाख रुपये सुरक्षित किए हैं। डीएसपी शिवा पाठक की मानें तो आरोपियों की संख्या अभी बढ़ सकती है, जांच जारी है।
जानकारी के मुताबिक बुधवार दोपहर करीब 2 बजे संजय पाठक की एक कंपनी के सीनियर अकाउंटेंट के पास उनके सीनियर डायरेक्टर गौतम के मोबाइल से डेढ़ करोड़ रुपये किसी अन्य व्यक्ति के खाते में तत्काल भेजने का मैसेज आया। चूंकि मैसेज सीनियर डायरेक्टर के नंबर से आया था इसलिए अकाउंटेंट ने बिना किसी संदेह के पूरी राशि निर्धारित खाते में ट्रांसफर कर दी। वहीं जब शाम करीब 5 बजे फ्लाइट से उतरे डायरेक्टर और विधायक संजय पाठक को कंपनी के हुए साइबर फ्रॉड का तो पता चला तो विधायक पाठक ने तुरंत कटनी पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को पूरी घटना से अवगत कराया। इसके बाद कटनी पुलिस एक्शन मोड पर कार्रवाई करते हुए कुछ खाते पर होल्ड कराई और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 3 टीमें देशभर के विभिन्न राज्यों और जिलों में सक्रिय होते ही फैल गई।
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डीएसपी शिवा पाठक ने बताया कि इस संबंध में कंपनी के अकाउंटेंट शैलेश तिवारी की शिकायत पर रंगनाथ नगर थाना में साइबर ठगी का FIR दर्जकर लिया गया है और साइबर सेल की मदद से जांच की जा रही है। साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक टीम को चार आरोपी को अरेस्ट करने पर सफलता मिली, वही ठगों के खाते से अब तक करीब 27 लाख रुपये से अधिक की राशि होल्ड (फ्रीज) करवा ली है। इस तरह के साइबर अपराध को बॉस फ्रॉड कहते हैं। जहां वॉट्सएप हैक करते हुए ठगी की घटना को अंजाम दिया जाता है। कटनी पुलिस की टीम ने नरसिंहपुर के करेली से 4 आरोपी को अरेस्ट किया गया है। पूछताछ में पाया कि ये राज्यस्तरीय गिरोह है जिसके सबसे निचले स्तर के लिए आरोपी काम करते थे। डीएसपी की मानें तो ये शुरुआती कार्रवाई है इसके अभी कई लोग अरेस्ट होंगे और बड़ी रकम जल्द बरामद करेंगे।
आपको बता दें मैसर्स रामचंद्र एंड बद्रीनाथ फर्म के शिकायतकर्ता अकाउंटेंट शैलेश तिवारी ने बताया था कि उसे सीनियर डायरेक्टर का मैसेज आया कि इतना पैसा ट्रांसफर करना है क्योंकि सीनियर डायरेक्टर की फोटो लगी हुई थी और नाम भी वैसा ही आया तो अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से पहले 1 करोड़ 16 लाख फिर 33 लाख की राशि ट्रांसफर कर दिए। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार साइबर ठगों ने दो-तीन घंटे में ही पूरा पैसा साफ कर करीब 200 हिस्सा के डिस्ट्रीब्यूशन किया था कहीं एटीएम तो कहीं चेक के माध्यम से पैसा निकाला गया है। यह टिपिकल साइबर फ्रॉड है और इसे बॉस स्कैम कहा जाता है फ़िलहाल साइबर टीम पूरे मामले की तहकीकात में जुटी हुई है।