मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू ने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा में 36 लोगों की मौत ने शहर की छवि खराब की, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम ने कोई सबक नहीं लिया। कांग्रेस ने इंदौर के 29 वार्डों से पानी के सैंपल लिए, जिन्हें रासायनिक जांच के लिए दिल्ली भी भेजा गया। जांच में 240 में से 98 सैंपल फेल पाए गए। पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया सहित अन्य हानिकारक बैक्टीरिया मिले, जो डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों में पीने के पानी की जांच के लिए 26 दिनों तक लाइव लैब अभियान चलाया गया। इस दौरान गाड़ियां अलग-अलग इलाकों में घूमीं और पानी के सैंपल एकत्र कर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए। यह अभियान तीन फरवरी से 28 फरवरी तक चलाया गया।
'पानी दूषित होने का खतरा बढ़ गया'
वाटर ऑडिट कराने की उठी मांग
मीडिया से चर्चा के दौरान पटवारी ने इंदौर के छह तालाबों के सूखने, लगातार गिरते भूजल स्तर और सूखते बोरवेलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने नगर निगम द्वारा किए गए वाटर रिचार्ज कार्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परिणाम नगण्य हैं।
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उन्होंने छावनी समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर की जा रही तोड़फोड़ का भी विरोध किया। उनका कहना था कि वर्षों से बसे लोगों के वैध निर्माणों को मास्टर प्लान के नाम पर तोड़ा जा रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा तक नहीं दिया जा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उज्जैन में प्रभावितों को मुआवजा दिया जा सकता है, तो इंदौर की जनता के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि टीडीआर और एफएआर के नाम पर भी जनता को गुमराह किया जा रहा है।