वर्दी की मर्यादा और कानून का इकबाल जब मंच पर ही सवालों के घेरे में आ जाए, तो पुलिस की साख पर बट्टा लगना तय है। दतिया से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां आंबेडकर जयंती के सार्वजनिक समारोह में कानून के रखवाले ही एक अपराधी के हाथों सम्मानित होते नजर आए।
मामला सिनावल थाने के घोषित हिस्ट्रीशीटर दिनेश अहिरवार से जुड़ा है। आंबेडकर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में एसडीओपी आकांक्षा जैन और कोतवाली टीआई धीरेंद्र मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। मंच पर मौजूद हिस्ट्रीशीटर दिनेश अहिरवार ने दोनों अधिकारियों को फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। हैरानी की बात यह रही कि पुलिस अधिकारियों ने न तो कोई आपत्ति जताई और न ही दूरी बनाई, बल्कि बदमाश के साथ मुस्कुराते हुए तस्वीरें भी खिंचवाईं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस हिस्ट्रीशीटर से अधिकारी माला पहन रहे थे, उसी का पहले सिविल लाइन पुलिस द्वारा शहर में जुलूस निकाला गया था। अपराध नियंत्रण के उद्देश्य से निकाले गए उस जुलूस का मकसद जनता में सख्त संदेश देना था। लेकिन बाद में उसी बदमाश के हाथों वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मानित होना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया
पुलिस की छवि धूमिल करने वाली इस घटना पर एसपी मयूर खंडेलवाल ने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने एसडीओपी आकांक्षा जैन और टीआई धीरेंद्र मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। एसपी ने स्पष्ट कहा कि अनुशासनहीनता और आचरणहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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‘खाकी और अपराधियों के गठजोड़’ की आशंका
पुलिस का काम अपराधियों में खौफ पैदा करना है, न कि उनके साथ मंच साझा कर सम्मान लेना। दतिया की इस घटना ने पूरे प्रदेश में पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।