भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भले ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को ‘‘चतुर बनिया’’ मानते हों मगर किसानों के हिंसक आंदोलन से जूझ रहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सोच कुछ अलग है। उन्होंने कहा कि मैं भी इंसान हूं, पत्थर दिल नहीं हूं। मंदसौर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से अंदर तक हिल गया। कैसे बर्दाश्त करूं। लिहाजा गांधी जी का रास्ता चुना। किसानों से अपील करता हूं कि इस प्रदेश को हिंसा की आग में मत धकेलो। आओ, हम बात करेंगे। यहीं बैठकर सरकार चलाएंगे।
मध्य प्रदेश में शांति बहाली के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को यहां भेल दशहरा मैदान पर अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर दिया। सुबह लगभग 11 बजे वह अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ दशहरा मैदान पहुंचे। नेहरू जैकेट और कुर्ता पायजामा पहने शिवराज का पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने तिलक किया। इसके बाद चौहान ने अपनी पत्नी के साथ जोशी के चरण छूकर उपवास प्रारंभ कर दिया। हालांकि विरोधी दल कांग्रेस ने उनके इस उपक्रम को ‘‘मामा का ड्रामा’’ बताया है। उल्लेखनीय है कि 1 जून से प्रारंभ हुए किसानों के इस आंदोलन का आज आखिरी दिन है।
उपवास के लिए दशहरा मैदान पर बड़ा पंडाल बनाया गया है। मंच पर राज्य मंत्रिमंडल के अनेक सदस्य भी सीएम के साथ उपवास पर हैं। मंच के पीछे एक कक्ष में चौहान ने आसपास के जिलों से आए किसानों के प्रतिनिधिमंडलों से उनकी समस्याएं सुनीं। इसके पहले अपने भाषण में उन्होंने कहा, जब-जब प्रदेश में किसानों पर संकट आया, मैं सीएम आवास से निकलकर उनके बीच पहुंच गया। हम नया आयोग बनाएंगे जो फसलों की सही लागत तय करेगा। उस लागत के हिसाब से हम किसानों को सही कीमत दिलाएंगे। किसान आग न लगाएं, चर्चा के लिए आएं।
उन्होंने कहा कि मैं साढ़े 11 साल से सीएम हूं, मैंने सबसे ज्यादा ध्यान किसानों पर दिया। किसान के बिना मध्य प्रदेश आगे नहीं बढ़ सकता। मंदसौर में जो दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, उससे मैं अंदर तक हिल गया। जो किसान इस दुनिया से चले गए, उन्हें हम वापस नहीं ला सकते। पर मैं और पूरी सरकार किसान के साथ खड़ी है। मेरे रहते पुलिस जनता पर डंडे बरसाए, इससे मुझे पीड़ा होती है। मन में पीड़ा है, इसलिए उपवास पर बैठा हूं। यह गांधीजी का तरीका है। हिंसा से कोई लाभ नहीं होता।
100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें 6 की हालत गंभीर है। 197 प्राइवेट और 127 सरकारी वाहन जला दिए गए। जिस दूध को माथे से लगाते हैं, उसे बहा दिया। सब्जी फेंक दी। इसे कैसे जायज ठहरा सकते हैं। क्या यह सब शिवराज की जेब की संपत्ति है, उन्होंने पूछा। कहा कि मैं भी इंसान हूं, पत्थर दिल नहीं हूं, कैसे बर्दाश्त करूं।