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क्या होता है स्टार प्रचारक का तमगा, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक गए कमलनाथ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/भोपाल Published by: योगेश साहू Updated Mon, 02 Nov 2020 08:28 PM IST
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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ - फोटो : एएनआई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से स्टार प्रचारक का दर्जा छीनने के चुनाव आयोग के फैसले पर रोक लगा दी और आयोग से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। अब सवाल ये है कि आखिर क्या होता है ये स्टार प्रचारक?

दरअसल, चुनाव कोई भी हो इसे जीतने के लिए पार्टी ऐसे नेताओं और सिलेब्रिटी को प्रचार के लिए उतारती हैं, जिन्हें देखने और सुनने के लिए रैलियों में भारी भीड़ उमड़ती है। इनका जनता पर खासा प्रभाव होता है। इन नेताओं और शख्सियतों को स्टार प्रचारक कहा जाता है।



ये अपने भाषणों से पार्टी और उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के लिए अपील करते हैं। आमतौर पर इनकी सभाएं ऐसे इलाकों में रखी जाती हैं, जहां वोट मिलने की संभावना ज्यादा होती है। खास बात यह है कि हर उम्मीदवार अपने क्षेत्र में स्टार प्रचारक की सभा कराना चाहता है।

चुनाव आयोग की इस पर नजर होती है। कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए ये स्टार प्रचारक हैलीकॉप्टर, एयरोप्लेन जैसे संसाधनों का उपयोग भी करते हैं। हालांकि ये खर्च उम्मीदवार के चुनाव खर्च में नहीं जोड़ा जाता, इसे पार्टी का खर्च माना जाता है।

निर्वाचन आयोग के नियम कहते हैं कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दल अपने लिए ज्यादा से ज्यादा 40 स्टार-प्रचारक रख सकते हैं। एक गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल के लिए ये सीमा 20 स्टार-प्रचारकों की है। चुनावों के दौरान संबंधित चरण की अधिसूचना जारी होने के 7 दिनों के भीतर दलों को अपने स्टार प्रचारकों के नामों की लिस्ट आयोग को सौंपनी होती है।

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ - फोटो : एएनआई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से स्टार प्रचारक का दर्जा छीनने के चुनाव आयोग के फैसले पर रोक लगा दी और आयोग से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। अब सवाल ये है कि आखिर क्या होता है ये स्टार प्रचारक?

दरअसल, चुनाव कोई भी हो इसे जीतने के लिए पार्टी ऐसे नेताओं और सिलेब्रिटी को प्रचार के लिए उतारती हैं, जिन्हें देखने और सुनने के लिए रैलियों में भारी भीड़ उमड़ती है। इनका जनता पर खासा प्रभाव होता है। इन नेताओं और शख्सियतों को स्टार प्रचारक कहा जाता है।

ये अपने भाषणों से पार्टी और उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के लिए अपील करते हैं। आमतौर पर इनकी सभाएं ऐसे इलाकों में रखी जाती हैं, जहां वोट मिलने की संभावना ज्यादा होती है। खास बात यह है कि हर उम्मीदवार अपने क्षेत्र में स्टार प्रचारक की सभा कराना चाहता है।

चुनाव आयोग की इस पर नजर होती है। कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए ये स्टार प्रचारक हैलीकॉप्टर, एयरोप्लेन जैसे संसाधनों का उपयोग भी करते हैं। हालांकि ये खर्च उम्मीदवार के चुनाव खर्च में नहीं जोड़ा जाता, इसे पार्टी का खर्च माना जाता है।

निर्वाचन आयोग के नियम कहते हैं कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दल अपने लिए ज्यादा से ज्यादा 40 स्टार-प्रचारक रख सकते हैं। एक गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल के लिए ये सीमा 20 स्टार-प्रचारकों की है। चुनावों के दौरान संबंधित चरण की अधिसूचना जारी होने के 7 दिनों के भीतर दलों को अपने स्टार प्रचारकों के नामों की लिस्ट आयोग को सौंपनी होती है।

क्या हैं स्टार प्रचारकों के लिए नियम?

निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद-324 के तहत चुनाव के नियमों में बदलाव का अधिकार मिला हुआ है। आयोग ने प्रचार से संबंधित नियम में बदलाव की गाइडलाइंस कुछ समय पहले जारी की थी। इसके मुताबिक, प्रत्याशी के साथ पांच व्यक्ति घर-घर जाकर प्रचार कर सकते हैं। 

रोड शो के दौरान 10 की जगह अब 5-5 गाड़ियों का काफिला रह सकता है। इसमें दो गाड़ियों के बीच आधे घंटे का अंतर रखना जरूरी होता है। हालांकि इनमें सुरक्षाकर्मियों और सुरक्षा के लिए दी गई गाड़ियों की संख्या शामिल नहीं की जाती है।

स्टार प्रचारक के किए गए खर्च का एक नियम ये भी?

जब कोई उम्मीदवार अपने क्षेत्र में स्टार प्रचारक की सभा या रैली करवाता है तो इस पर खर्च भी काफी होता है। क्योंकि जगह-जगह रैली, सभा और रोड शो करने के लिए इन स्टार प्रचारकों को काफी यात्रा करनी होती है।

इसके लिए हेलीकॉप्टर, ट्रेन और कार का इस्तेमाल होता है। ऐसे में संसाधनों पर होने वाले खर्च को प्रत्याशी के चुनावी खर्च में नहीं जोड़ा जाता है, बल्कि इसे पार्टी की ओर से किया गया खर्च माना जाता है। प्रचार के दौरान स्टार प्रचारक पार्टी की गाड़ी में अपने साथ सिर्फ एक निजी कर्मचारी को बैठा सकते हैं।

अगर उस गाड़ी में किसी और नेता का कर्मचारी बैठता है तो उसका खर्च, उम्मीदवार के खर्च में जोड़ा जाता है। स्टार प्रचारक किसी होटल में रुकता है तो इसका भी खर्च उम्मीदवार के खाते में जोड़ा जाता है।

काफी थकाऊ होती है स्टार प्रचारक की दिनचर्या

स्टार प्रचारकों की दिनचर्या काफी थकाऊ होती है। क्योंकि स्टार प्रचारकों को एक ही दिन में तीन या चार रैलियों में जाना होता है। रोड शो करने होते हैं। ऐसे में सुबह जल्दी उठकर तैयारी करनी होती है। इसके अलावा दिनभर लोगों से मिलना उनसे बात करना या भाषण देना होता है।

साथ ही आते और जाते वक्त हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करना और चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनाए रखना। इसके बाद जिस उम्मीदवार के प्रचार के लिए जा रहे हैं, उनसे जुड़ी जानकारी याद रखना और जनता के सामने उन उम्मीदवारों के कार्यों का बखान करना भी स्टार प्रचारक का काम होता है। यह बहुत जिम्मेदारी वाला काम होता है।
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