सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से स्टार प्रचारक का दर्जा छीनने के चुनाव आयोग के फैसले पर रोक लगा दी और आयोग से जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। अब सवाल ये है कि आखिर क्या होता है ये स्टार प्रचारक?
दरअसल, चुनाव कोई भी हो इसे जीतने के लिए पार्टी ऐसे नेताओं और सिलेब्रिटी को प्रचार के लिए उतारती हैं, जिन्हें देखने और सुनने के लिए रैलियों में भारी भीड़ उमड़ती है। इनका जनता पर खासा प्रभाव होता है। इन नेताओं और शख्सियतों को स्टार प्रचारक कहा जाता है।
ये अपने भाषणों से पार्टी और उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के लिए अपील करते हैं। आमतौर पर इनकी सभाएं ऐसे इलाकों में रखी जाती हैं, जहां वोट मिलने की संभावना ज्यादा होती है। खास बात यह है कि हर उम्मीदवार अपने क्षेत्र में स्टार प्रचारक की सभा कराना चाहता है।
चुनाव आयोग की इस पर नजर होती है। कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए ये स्टार प्रचारक हैलीकॉप्टर, एयरोप्लेन जैसे संसाधनों का उपयोग भी करते हैं। हालांकि ये खर्च उम्मीदवार के चुनाव खर्च में नहीं जोड़ा जाता, इसे पार्टी का खर्च माना जाता है।
निर्वाचन आयोग के नियम कहते हैं कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दल अपने लिए ज्यादा से ज्यादा 40 स्टार-प्रचारक रख सकते हैं। एक गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल के लिए ये सीमा 20 स्टार-प्रचारकों की है। चुनावों के दौरान संबंधित चरण की अधिसूचना जारी होने के 7 दिनों के भीतर दलों को अपने स्टार प्रचारकों के नामों की लिस्ट आयोग को सौंपनी होती है।