देश की जड़ों को खोखला करने और युवाओं के दिमाग में कट्टरता का जहर घोलने की एक बड़ी और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। राजधानी भोपाल के काजीकैंप से मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा गिरफ्तार मोहम्मद फराज और उत्तर प्रदेश के देवबंद (सहारनपुर) निवासी नईम अब्दुल्ला पूरे देश में उग्र जिहाद फैलाने के नेटवर्क पर काम कर रहे थे।
छह साल से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे आरोपी
जांच में सामने आया है कि फराज और नईम पिछले छह साल से भी अधिक समय से एक ही पाकिस्तानी हैंडलर के सीधे संपर्क में थे। नईम ने ही फराज का परिचय उस पाकिस्तानी हैंडलर से करवाया था। ये दोनों उसी हैंडलर के इशारे पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी हैंडलर भी इन्हें लगातार कट्टरपंथी साहित्य और अन्य लिखित सामग्री भेजता था। नईम को किताबें पढ़ने का बेहद शौक था और फराज को पूरी तरह कट्टर बनाने के लिए वह उसे लगातार यह डिजिटल सामग्री उपलब्ध करा रहा था। इस सिलसिले में नईम वर्ष 2025 में भोपाल भी आया था और फराज के घर पर रुका था।
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सिमी और पीएफआई से था संपर्क, गिरफ्तारी से बचने बदलते थे सिम कार्ड
एटीएस को मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह के तार प्रतिबंधित संगठन सिमी और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सक्रिय सदस्यों से जुड़े होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इसके साथ ही तकनीकी जांच में आरोपियों की बड़ी चालाकी भी सामने आई है। एटीएस को नईम के पास से 10 से अधिक मोबाइल नंबर और फराज व इजहार उल हक के पास से 5 से 6 अलग-अलग मोबाइल नंबर मिले हैं।
अंदेशा जताया जा रहा है कि देश विरोधी और संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देते समय सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए ये लगातार अपने सिम कार्ड बदलते रहते थे। एटीएस इनके पूरे डिजिटल फुटप्रिंट और वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी है, ताकि इस स्लीपर सेल के बाकी नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया जा सके।