कमलनाथ सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा को पुलिस ने रविवार शाम को उनके छह समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया। इसके कुछ घंटे बाद इंदौर प्रशसन ने शहर के बाहरी इलाके में इंदौर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित उसके दो एकड़ में बने आलीशान आश्रम को भी ध्वस्त कर दिया। पिछली कांग्रेस सरकार में कंप्यूटर बाबा को नदी ट्रस्ट का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
प्रशासन का दावा है कि जांबुडी हाप्सी गांव में करीब 80 करोड़ रुपये की कीमत वाली 46 एकड़ सरकारी जमीन कब्जाने के बाद उसके दो एकड़ हिस्से में आश्रम बनाया गया था और उसमें सभी तरह की आलीशान सुख-सुविधाएं मौजूद थीं।
एडिशनल कलेक्टर अजय देव शर्मा के मुताबिक, प्रशासनिक टीम आश्रम में सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माण को ढहाने गई थी। बाबा और उनके समर्थकों ने सरकारी काम में बाधा डाली, इसके बाद उन्हें सीआरपीसी की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया। सभी को जेल भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि आश्रम में एक 315 बोर की राइफल और एयरगन भी बरामद हुई है। इन हथियारों के लाइसेंस की जांच पुलिस कर रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यह 46 एकड़ जमीन जिला पंचायत को गौशाला बनाने के लिए दी गई थी। इस पर त्यागी ने कब्जा कर लिया था। आश्रम पर पिछले दिनों राजस्व विभाग ने दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया था और प्रबंधन से अवैध निर्माण हटाने को कहा गया था। इसके बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल के साथ अवैध निर्माण हटाने पहुंची थी।
कांग्रेस ने लगाया राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
कांग्रेस ने कंप्यूटर बाबा का आश्रम गिराए जाने को बदले की कार्रवाई बताया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रविवार को ट्वीट में कहा, इंदौर में कंप्यूटर बाबा का आश्रम और मंदिर बिना किसी पूर्व नोटिस के ध्वस्त कर दिया गया। यह राजनीतिक प्रतिशोध है। मैं इसकी निंदा करता हूं।
बता दें कि कंप्यूटर बाबा ने 2018 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। बाद में उन्होंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था।