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इंदौर: किसान बोले- हमें बर्बाद करने के लिए लाए कृषि विधेयक, 26 नवंबर को दिल्ली चलो..

Sun, 08 Nov 2020 11:33 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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किसान, मजदूर और आदिवासी सम्मेलन - फोटो : amar ujala
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केंद्र की मोदी सरकार ने लाकडाउन की आड़ में 44 श्रम कानूनों में बदलाव कर जहां श्रमिकों का जीना दूभर कर दिया है, वहीं तीन कृषि विधेयकों से जमीन को पूंजीपतियों को और कॉर्पोरेट घरानों को देने की साजिश रची है। इससे देशभर में मजदूरों किसानों में आक्रोश है और 26 तथा 27 नवंबर को देश के लाखों किसान मजदूर सड़कों पर होंगे। दिल्ली में भी घेराव होगा और देश के सभी हिस्सों में मजदूर और किसान आंदोलन करेंगे। यह बात इंदौर में आयोजित किसान मजदूर आदिवासी अधिकार सम्मेलन में बोलते हुए वक्ताओं ने कही।

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बता दें कि हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से पारित कराए गए कृषि विधेयकों के विरोध में देशभर के 300 से ज्यादा किसान संगठनों का साझा मंच ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति बनाई गई है। इस समिति की अपील पर देश के कोने कोने में किसान मजदूर आदिवासी सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। समिति की ओर से 26 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल और 26-27 नवंबर को दिल्ली चलो आंदोलन करने की अपील की जा रही है।

इसी क्रम में नर्मदा बचाओ आंदोलन, ऑल इंडिया किसान महासभा, ऑल इंडिया किसान खेत-मजदूर संगठन, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ एंव किसान संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति इंदौर की ओर से एक किसान आदिवासी मजदूर सम्मेलन यहां प्रेस क्लब में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की गई और 26 नवंबर को दिल्ली चलो का नारा भी दिया गया।
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इस मौके पर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की मेधा पाटकर ने कहा कि गांव गांव में आज किसान, आदिवासी, मछुआरे और मजदूर तबका बदहाली की स्थिति में है। सरकारी नीतियों के चलते आज ग्रामीण आदिवासियों वनवासियों को उनकी जल जंगल जमीन से बेदखल किया जा रहा है। वहीं बरसों पुरानी संचालित सेंचुरी जैसी मिलों को बंद किया जा रहा है। सरकार पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों को देसी विदेशी कॉर्पोरेट के हवाले कर रही है।

ऐसे में कृषि सुधार के नाम पर पारित किए गए तीनों कानून किसानों को बड़ी-बड़ी कंपनियों का बंधक बना देंगे, इनके खिलाफ सभी लोगों को एक एकजुट होने की जरूरत है। कार्यक्रम में पूर्व एडवोकेट जनरल आनंद मोहन माथुर ने कहा कि सरकार कृषि को पूरी तरह कार्पोरेट के हवाले कर रही है। नई बीज नीति भी लाने का प्रयास किया जा रहा है, जो किसान को बीज के लिए कंपनियों पर निर्भर कर देगी।

ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राज्य सचिव मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि देशभर के किसानों द्वारा लंबे अरसे से उठाई जा रही "कर्ज से मुक्ति और और फसलों की लागत से डेढ़ गुना लाभकारी दाम" देने की दो प्रमुख मांगों को सरकार ने अनदेखा किया है। नए कृषि कानून से न सिर्फ किसान बल्कि आम जनता, मंडी कर्मचारी, हम्माल व छोटे छोटे स्थानीय व्यापारी तबाह हो जाएंगे।

अखिल भारतीय किसान महासभा के जसविंदर सिंह ने कहा कि आवश्यक वस्तु कानून 1955 में संशोधन कर भाजपा सरकार ने भोजन के लिए जरूरी सभी अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, आलू व प्याज छह तरह की चीजों के स्टाक को चाहे जितनी मात्रा में जमा करने की अनुमति दे दी है। साफ जाहिर है कि व्यापारिक कंपनियां किसानों से इन आवश्यक वस्तुओं को सस्ते दामों पर खरीद कर अपने गोदामों में इन्हें भारी मात्रा में जमा कर सकेंगी और बाजार में बनावटी कमी दिखाकर उन्हें महंगे दामों पर बेच कर मुनाफा कमाएंगी।

वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राहुल राज ने सभी से 26 नवम्बर को दिल्ली चलने की अपील की। सम्मेलन में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के कार्यकारी मंडल की सदस्य मेधा पाटकर, किसान मजदूर महासंघ के राहुल राज, अखिल भारतीय किसान सभा के जसविंदर सिंह और रामनारायण कुंरवारिया, ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के मनीष श्रीवास्तव, आनंदमोहन माथुर, किसान संघर्ष समिति के रामस्वरूप मंत्री, मजदूर नेता विजय शर्मा, प्रमोद नामदेव, केएस दुबे सहित विभिन्न वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन अरुण चौहान और प्रमोद नामदेव ने किया।

अंत में कार्पोरेट भगाओ देश बचाओ, लड़ेंगे- जीतेंगे जैसे नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी जिलों से किसान और मजदूर दिल्ली के लिए कूच करेंगे, साथ ही जिला मुख्यालयों पर और संभागीय मुख्यालयों पर प्रदर्शन भी होंगे। करीब 3 घंटे चले सम्मेलन में दिनेश कुशवाहा, मुन्ना लाल साहनी, विजय शर्मा, मोहम्मद अली सिद्दीकी, छेदी लाल यादव, रामकिशन मौर्या, माता प्रसाद मौर्य, अजय यादव, शफी शेख, अकबर अहमद, भरत सिंह यादव आदि मौजूद रहे।

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