सार
मध्य प्रदेश में बौद्ध मठों के पते पर 2021 से 2023 के बीच 70 संदिग्ध पासपोर्ट जारी होने का मामला सामने आया है। एसटीएफ ने छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि 29 फरार आरोपितों पर इनाम घोषित किया गया है।
मध्य प्रदेश में बौद्ध मठों के पते पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर वर्ष 2021 से 2023 के बीच 70 संदिग्ध पासपोर्ट जारी किए जाने का मामला सामने आया है। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) इस मामले की जांच कर रहा है। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने बताया कि बौद्ध मठों के पते पर पुलिस सत्यापन के दौरान गहन पूछताछ नहीं की जाती थी। इसी का फायदा उठाकर गिरोह ने पासपोर्ट बनवाए।
एसटीएफ की जांच के अनुसार, गिरोह के मुख्य सरगना रियाल चौधरी समेत छह आरोपितों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, फरार 29 आरोपितों पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
विभिन्न जिलों में फर्जी पतों का इस्तेमाल
एसटीएफ के अनुसार, भोपाल के अन्नानगर स्थित बौद्ध मठ के पते पर 40 पासपोर्ट बनवाए गए। ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर 17 और बैतूल के आमला में 11 पासपोर्ट बनाए जाने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भी एक-एक संदिग्ध पासपोर्ट बनाया गया। शुरुआती जांच में एसटीएफ ने सभी 70 पासपोर्ट को संदिग्ध माना था। अब तक की जांच में दो पासपोर्ट सही पाए गए हैं, जबकि शेष 68 पासपोर्ट की विस्तृत जांच जारी है।
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मठों के बजाय झुग्गी-बस्तियों में रहते थे आवेदक
एसटीएफ की पड़ताल में सामने आया है कि सत्यापन कराने वाले आवेदक वास्तव में मठों के आसपास स्थित झुग्गी-बस्तियों में रह रहे थे, लेकिन पासपोर्ट के पुलिस सत्यापन में उन्होंने अपने घर के बजाय बौद्ध मठ का पता दर्ज कराया था। एसटीएफ के अनुसार, इनमें से कुछ आवेदकों के अभिभावक बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। उन्होंने असम और अन्य राज्यों से आधार कार्ड तथा अन्य पहचान दस्तावेज बनवाए थे। जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले 10 लोग विदेश गए और वापस भारत नहीं लौटे। इन पासपोर्ट में मध्य प्रदेश के स्थानीय पते दर्ज थे, जबकि जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज दूसरे राज्यों से बनवाकर प्रस्तुत किए गए थे।
पुलिसकर्मियों और पासपोर्ट अधिकारियों की भूमिका की जांच
एसटीएफ अब पासपोर्ट जारी होने से पहले भौतिक सत्यापन करने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। इसके अलावा पासपोर्ट कार्यालय के उन कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिन्होंने दस्तावेजों की जांच के दौरान कथित तौर पर लापरवाही बरती।
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, भोपाल से स्थानांतरित हो चुके एक पासपोर्ट अधिकारी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। फर्जीवाड़े को संचालित करने में भोपाल के एक दलाल की भी प्रमुख भूमिका सामने आई है। फिलहाल एसटीएफ की कई टीमें आरोपितों की तलाश में विभिन्न राज्यों में सर्च अभियान चला रही हैं।