मुरैना जिले के सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नौनिहालों को बेहतर माहौल देने का सरकार भले ही तमाम प्रयास कर रही हो, लेकिन पोरसा में तैनात शिक्षक सरकार की मंशा पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं, जिन छात्रों के हाथों में कलम और किताब होनी चाहिए, उन हाथों से मासूम बच्चे स्कूल परिसर में ईंट और गिट्टी सीमेंट बना मसाला ढो रहे हैं और उनसे बच्चों से मजदूरों जैसा काम करवाया जा रहा है।
नौनिहालों को पढ़ाने के बजाय उनसे स्कूल की गिट्टी ढोने और घास साफ कराने का काम लिया जा रहा है। परिजन बच्चों को इस विश्वास के साथ स्कूल भेजते हैं कि वहां प्रशिक्षित अध्यापक जो पढ़ाएंगे, उससे उन मासूमों का बौद्धिक विकास होगा। लेकिन स्कूल में बच्चों से मजदूरी करवाई जा रही है।
बच्चे कर रहे काम...
शासकीय प्राथमिक स्कूल दुर्ग का पुरा का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें जो दिखाई दे रहा है, उसके अनुसार स्कूल परिसर में जल जीवन मिशन के तहत ठेकेदार द्वारा प्लेटफॉर्म का निर्माण करवाया जा रहा है। उसके लिए एक व्यक्ति सीमेंट, गिट्टी का मसाला बना रहा है और बच्चे तसला में मसाला ले जा रहे हैं। ईंट उठा रहे हैं, वहीं सफाई भी कर रहे हैं। ठेकेदार को लेबर से काम करवाना था, लेकिन यहां मजदूर दिखाई नहीं दे रहे हैं और मजदूरों का काम बच्चों से करवाया जा रहा है।
शिक्षकों ने इसका विरोध नहीं किया...
विडंवना इस बात की है कि बच्चों से काम करवाया जा रहा है तो शिक्षकों ने इस बात का विरोध क्यों नहीं किया। स्कूल स्टॉफ की लापरवाही से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ा हो रहा है। बच्चों के स्कूल पहुंचते ही उन्हें पढ़ाने के बजाय गिट्टी ढोने और घास साफ करने के काम में लगा दिया जाता है। जब इस मामले जिला शिक्षा अधिकारी से पूछा गया तो उनका कहना था कि मुझे मीडिया के माध्यम से पता चला है और मैं इस स्कूल का पता करके जांच करूंगा। साथ ही दोषी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करूंगा।