पिछले ग्यारह महीनों में मध्यप्रदेश पुसिस के खिलाफ लगभग 1 लाख 21 हजार शिकायतें दर्ज की गई हैं। ज्यादातर शिकायतें एफआईआर दर्ज न करने को लेकर की गई हैं। लोग प्रताड़ित होने पर पुलिस के पास जात हैं पर जब पुलिस ही न सुने तो वो कहां जाएं। इसी को लेकर लोग सीएम हेल्पलाइन नंबर पर पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज करा रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों का ग्राफ लगातार ऊंचा उठता जा रहा है।
मात्र 11 महीनों में लगभग 1 लाख 21 हजार शिकायतें पुलिस के खिलाफ आई हैं। इसका खुलासा सीएम हेल्पलाइन में दर्ज आंकड़ों से उभरकर सामने आया है। इनमें सर्वाधिक मामले एफआईआर नहीं लिखने के हैं। 41 हजार 464 शिकायतें ऐेसी आई हैं जिनमें बताया गया है कि पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर भी एफआईआर नहीं लिखी या फिर लिखने में देरी की। कुछ शिकायतें तो एफआईआर में सही धाराएं नहीं लगाने की भी हैं।
26 हजार 632 ऐसी शिकायतें हैं, जिनमें पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी जल्दी नहीं की और फरियादी पर राजीनामे के लिए दबाव बनाया। 22 हजार 913 ऐसी शिकायतें हैं, जिनमें फरियादी ने बताया कि पुलिस ने विवेचना में लापरवाही बरती और समय पर चालान पेश नहीं किया। जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है उसके बाद पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है।
प्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन ने कहा कि हम सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों की जानकारी लेकर इनकी समीक्षा कर रहे हैं। इसमें यह पता चला है कि बीते पांच महीनों में शिकायतों का आंकड़ा कम हुआ है। हम इसे और कम करना चाहते हैं।
हम ऐसे इंतजाम करेंगे कि पीड़ित थाने जाने से डरे नहीं और आरोपी बच न पाएं। रिपोर्ट में ग्यारह महीनों में साढ़े पांच भाजपा और साढ़े पांच महीने कांग्रेस की सरकार के हैं। दावा किया गया है कि कांग्रेस के शासन में शिकायतों में कमी आई है।