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Mandsaur News: मामा ने 10 तो भांजे ने 5 बीघा तैयार फसल पर चलाया ट्रैक्टर, नष्ट करने की बताई ये वजह

Tue, 20 Aug 2024 04:47 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंदसौर

सार

किसान ने कहा कि अगर सोयाबीन का नया भाव 3,500 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल खुलता है, तो यह नुकसान का सौदा होगा और लागत भी नहीं निकल पाएगी। सोयबीन बोने से अच्छा है खेत को खाली रख दिया जाए, ताकि खेत की उर्वरा शक्ति बची रहेगी।
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फसल पर ट्रैक्टर चलाता किसान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मंदसौर में सोशल मीडिया पर फसल पर ट्रैक्टर चलाकर नष्ट करने के दो अलग-अलग मामलों के वीडियो वायरल हुए। फसल का उचित दाम नहीं मिलने के कारण मजबूर होकर एक किसान ने करीब 10 बीघा तो दूसरे किसान ने करीब 5 बीघा सोयाबीन की फसल को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दी। 

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सोमवार को वायरल हुए वीडियो में गरोठ तहसील के किसान कमलेश पाटीदार ट्रैक्टर से अपने खेत में खड़ी फसल को नष्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं, मंगलवार को वायरल वीडियो दलौदा तहसील के ग्राम रकोदा का है, जिसमें किसान नागेश्वर पाटीदार भी अपने खेत में खड़ी सोयाबीन की फसल को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अपनी फसल को नष्ट करने वाले दोनों किसान रिश्ते में मामा भांजे हैं। 

किसानों के अपने ही हाथों से अपनी फसल को नष्ट करने को लेकर कांग्रेस भाजपा सरकार पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वायरल वीडियो को X पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर किसानों की पीड़ा को लेकर हमला बोला है।
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मंदसौर जिले की गरोठ तहसील के ग्राम देवरिया के किसान कमलेश पाटीदार और मंदसौर की दलौदा तहसील के ग्राम राकोदा के किसान नागेश्वर पाटीदार का कहना है कि हम कई वर्षों से सोयाबीन की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन आज के हालातों को देखते हुए सोयाबीन की खेती करना घाटे का सौदा लग रहा है। पिछले वर्ष भी सोयाबीन 3600-3900 क्विंटल बिकी जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। 

आज की परिस्थिति में सोयबीन बोने से अच्छा है खेत को खाली रख दिया जाए, ताकि खेत की उर्वरा शक्ति बची रहेगी। खेती में काम आने वाली तमाम तरह की दवाइयां, खाद-बीज की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन किसानों की फसल आज भी वही 3000 से 4000 क्विंटल में बिक रही है। इसके चलते हम लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। यही कारण है कि हमने अपने खेतों में ट्रैक्टर चलाकर सोयाबीन की फसल को नष्ट कर दिया है।

भाव नहीं मिलने से लागत निकालना भी मुश्किल
किसान कमलेश पाटीदार ने बताया कि पिछले वर्ष उसके 10 बीघा खेत में 140 क्विंटल सोयाबीन की फसल हुई थी, जिसे उसने शामगढ़ मंडी में 3 हजार 800 रुपये प्रति क्विंटल में बेचा है। अगर सोयाबीन का नया भाव 3 हजार 500 से 3 हजार 800 रुपये प्रति क्विंटल खुलता है, तो किसानों को नुकसान होगा। किसान पाटीदार ने दावा किया कि अब तक उसने 8 हजार रुपये प्रति बीघा खर्च किया है और फसल आने तक उसे 6 हजार रुपये प्रति बीघा और खर्च करने होंगे। किसान ने कहा कि अगर सोयाबीन का नया भाव 3,500 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल खुलता है, तो यह नुकसान का सौदा होगा और लागत भी नहीं निकल पाएगी।

कांग्रेस हुई भाजपा पर हमलावर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीडियो को X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मंदसौर के गरोठ में एक चौंकाने वाली और चिंताजनक घटना हुई। किसान कमलेश पाटीदार ने सोयाबीन की फसल पर अपना ट्रैक्टर केवल इसलिए चलाया, क्योंकि बाजार मूल्य से उन्हें लाभ होने के बजाय नुकसान हो रहा था। जीतू पटवारी ने वीडियो को X पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को टैग करते हुए लिखा कि ये दर्द केवल एक दो किसानों का नहीं है, बल्कि राज्य के हजारों किसान परिवारों का है। उन्होंने आगे दावा किया कि BJP सत्ता में आने के बाद सोयाबीन की फसल के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) के बारे में अपना वादा पूरा करने में विफल रही है।

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