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चुनावी ड्यूटी से भागने वाले कर्मचारियों को मंदसौर कलेक्टर की फेसबुक चिट्ठी, शाहरुख के बहाने तंज

Mon, 05 Nov 2018 12:56 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मध्यप्रदेश चुनाव के लिए टिकटों के एलान के साथ ही चुनावी मशीनरी भी तेजी से हरकत में आ रही है। ये मशीनरी कारगर तरीके से चलती रहे इसके लिए जरूरी है कि कर्मचारी छुट्टी लेने से बचें। जब ऐसा होता नहीं दिखा तो मंदसौर के जिला कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने छुट्टी मांगने वाले कर्मचारियों को फेसबुक के जरिए नसीहत जारी दे डाली। 

उन्होंने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा। पोस्ट की शुरुआत में श्रीवास्तव लिखते हैं, "मुझे अपने जिले में 7500 से ज्यादा कर्मचारियों को लेकर निर्वाचन कराना है। परंतु सच्चे-झूठे बहाने बनाकर निर्वाचन ड्यूटी न करने वालों के आवेदनों की बाढ़ सी आई हुई है। ऐसे ही लोगों को समर्पित है मेरी यह पोस्ट।"
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श्रीवास्तव बेहद दिलचस्प अंदाज में अपनी पोस्ट का पहला हिस्सा लिखते हैं। वो बिग बैंग से बात शुरू करके तुलसीदास और शाहरुख के चर्चित डायलॉग तक की बातें लिखकर कर्मचारियों के छुट्टी मांगने और ड्यूटी से दूर भागने की मानसिकता पर तंज कसते हैं। 

श्रीवास्तव ने लिखा, "ब्रह्माण्ड का उद्भव वैज्ञानिकों के लिए पहेली है। बिग-बैंग के पहले क्या हुआ होगा इस पर विज्ञान मौन है परंतु उपनिषदों के अनुसार ब्रह्म को एक से अनेक होने की इच्छा हुई - एकोsहं वहुस्याम: - और इसलिए सृष्टि की रचना हुई। इस प्रकार ब्रह्माण्ड में इच्छा ही है जो क्रिया में बदलती है। इसे ही 'ओम शांति ओम' फिल्म में शाहरूख खान ने डायलॉग के रूप में कहा है –अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहा है- जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू।। यहां भी वही सिद्धांत है कि चाह जितनी तीव्र होगी उसके पूरे होने की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी।
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इसके बाद वो सीधे मुद्दे पर आते हैं और छुट्टी मांगने वाले कर्मचारियों की बात करते हुए लिखते हैं, "आजकल मेरे पास निर्वाचन ड्यूटी से छूट पाने के लिए ढेरों आवेदन आ रहे हैं। उनमें से कुछ प्रमाणिक कारण वालों को छोड़ दें (जो कुल का 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हैं) तो शेष ऐसे लोगों के आवेदन हैं जो एक दिन भी जिम्मेदारी से कार्य नहीं करना चाहते। मैं अपने प्रशासनिक दायित्वों को पूरा करते हुए इन पर उचित निर्णय करुंगा ही, परंतु इन सब को मेरी सलाह है कि वे आत्मावलोकन करें कि क्या वे अपने जीवन में कोई चुनौती स्वीकार नहीं करना चाहते, क्या कुछ भी योजनाबद्ध ढंग से नहीं करना चाहते, क्या थोड़ी भी मेहनत नहीं करना चाहते, क्या वे समाज के लिए कुछ कष्ट नहीं उठाना चाहते ? यदि उनका उत्तर हॉं है तो वे अब अपने निजी जीवन पर विचार कर लें। वे पाएंगे कि उनका परिवार भी उनके इन्हीं दुर्गुणों के कारण अपेक्षित प्रगति नहीं कर पा रहा है। एक बात और, आप काम नहीं करना चाहते यह आपकी इच्छा है और इसलिए झूठी बीमारी का बहाना बना रहे हैं। आपकी काम न करने, चुनौतियं न लेने की इच्छा बहुत प्रबल है इसलिए प्रकृति आपकी मदद करेगी । भगवान न करे, आप उसी बीमारी से ग्रस्त हो जाएं जिसका बहाना बनाया जा रहा है ताकि आपको कार्य न करना पड़े । आखिर पूरी सृष्टि आपकी इच्छा की प्रबलता से ही संचालित हो रही है और आपको चयन की पूरी स्वतंत्रता है।"



मंदसौर के जिला कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव की ये फेसबुक पाती, सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही है। मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होना है। 
 
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