अपने पति और बच्ची के साथ वर्षा पटेल।
- फोटो : अमर उजाला
कहते हैं अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल मंज़िल तक पहुंचने से रोक नहीं सकती। इस कहावत को सच कर दिखाया है मैहर के एक छोटे से गांव भरेवा की बेटी वर्षा पटेल ने। कठिन परिस्थितियों, गर्भावस्था और प्रसव के बावजूद उन्होंने एमपीपीएससी की कठिन परीक्षा में महिला वर्ग में प्रथम रैंक हासिल कर उप पुलिस अधीक्षक डीएसपी का पद प्राप्त किया है।
वर्षा के पिता दमोह में सीमेंट फैक्ट्री में कार्यरत थे। दमोह में ही उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। इसके बाद कमला नेहरू गर्ल्स कॉलेज, दमोह से बायोलॉजी विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और लोकसेवा आयोग की तैयारी शुरू की। 2015 में पिता के निधन के बाद भी वर्षा ने हार नहीं मानी। वर्ष 2017 में उनका विवाह रामनगर निवासी संजय पटेल से हुआ। पति ने हर कदम पर उनका साथ दिया और पढ़ाई के लिए इंदौर भेजा। वर्षा ने एमपीपीएससी की परीक्षा कुल पांच बार दी, तीन बार इंटरव्यू तक पहुंची और पांचवीं बार में सफलता अर्जित की।
ये भी पढ़ें- करोड़ों खर्च फिर भी सर्वर ठप, लोक अदालत में बिल भरने आए लोग बेहाल, घंटों लगी रही कतारें
सबसे बड़ी बात यह रही कि वर्षा जब परीक्षा दे रही थीं, तब वे गर्भवती थीं। 22 जुलाई 2025 को उन्होंने बेटी श्रीजा को जन्म दिया। सीजर डिलीवरी के महज़ 27 दिन बाद ही 18 अगस्त को वे अपनी नवजात बच्ची को गोद में लेकर इंटरव्यू देने पहुंचीं और आत्मविश्वास के साथ सफलता हासिल की। वर्षा पहले से ही रीवा दुग्ध संघ में डेली डाक सहायक पद पर कार्यरत थीं। अब एमपीपीएससी 2022 परीक्षा परिणाम घोषित होते ही उनका चयन डीएसपी पद पर हुआ।
भावुक होकर कहा हर कदम पर मिला साथ
उनकी सफलता में पति संजय पटेल का अहम योगदान रहा। उन्होंने पत्नी के सपनों को साकार करने के लिए वाराणसी में मैनेजर की नौकरी तक छोड़ दी। वर्षा ने मीडिया से बातचीत करते हुए भावुक हो गईं, कहा कि "मेरे परिवार ने हर कदम पर मेरा साथ दिया और शादी के बाद मेरे पति ने मुझे पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। आज जब मेरा चयन डीएसपी पद पर हुआ है, तो यह मेरे लिए ही नहीं बल्कि मेरे पूरे परिवार और मैहर के लिए गर्व का क्षण है।"