बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक मध्यप्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर शिवलिंग को क्षरण से बचाने के लिए अब हलके गहने पहनाए जाएंगे। महाकालेश्वर मंदिर में शिवलिंग को श्रृंगार में पहनाए जानेवाले गहनों का वजह कम किया जाएगा। जिनमें खासतौर पर मुकुट, नाग कर्ण और मुंड माल का वजन आधा कर दिया जाएगा। अभी इन गहनों का वजन 6 किलो है। नए गहने 3 किलो से भी कम वजन के बनाए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल के शिवलिंग के संरक्षण और क्षरण से रोकने के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के विशेषज्ञों के दल से जांच कराई थी। विशेषज्ञों ने जांच के बाद मंदिर समिति को 13 बिंदुओं पर सुझाव दिए थे। इन सुझावों पर समिति अमल कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ दल को एक बार फिर मंदिर समिति द्वारा किए जा रहे सुधार कार्यों का मुआयना करने के लिए शुक्रवार को मंदिर भेजा। टीम के तीन सदस्यों ने मंदिर में शिवलिंग का क्षरण रोकने के किए जा रहे उपायों को देखा।
वजनी मुकुट से क्षरण की संभावना
इस दौरान जीएसआई उड़ीसा के उप महानिदेशक एलएल विश्वकर्मा ने मंदिर समिति अध्यक्ष और कलेक्टर मनीष सिंह को सुझाव दिया कि अन्य उपायों के साथ शिवलिंग पर से गहनों का वजन भी कम करना जरूरी है। वजनी मुकुट, मुंड माल और नाग कर्ण जिनका इस्तेमार महाकाल के श्रृंगार में रोज होता है, इनसे भी क्षरण की संभावना रहती है।
कलेक्टर ने बताया कि शिवलिंग पर पहले मखमल का कपड़ा लगाया जाता है तब गहने पहनाए जाते हैं ताकि चांदी के गहने शिवलिंग से सीधे न टकराएं। उन्होंने विश्वकर्मा के सुझाव पर मंदिर के कोठार में जाकर मुकुट, मुंड माल व नाग कर्ण की पड़ताल की और उनके वजन की जानकारी ली।
मंदिर के कर्मचारियों ने बताया कि इन गहनों का वजन करीब 6 किलो है। कलेक्टर ने गहने बनाने वाले अशोक जड़िया और कारीगर को बुलाकर उन्हें मौजूदा वजन से आधे से भी कम वजन में तीनों गहने तैयार करने को कहा।
हल्के गहनों का निर्माण ज्यादा संख्या में होगा
कलेक्टर ने गहने बनवाने के लिए तहसीलदार मूलचंद जूनवाल को अपने नेतृत्व में समिति बनाने के निर्देश दिए। इस समिति में मंदिर के अधिकारी और पुजारी भी शामिल होंगे। समिति गहनों के लिए चांदी देने और निर्माण तक की जिम्मेदारी उठाएगी। मंदिर में चढ़ाए गए छोटे-बड़े गहनों को गला कर चांदी इकट्ठा होगी।
कलेक्टर ने बताया कि हल्के गहनों का ज्यादा संख्या में निर्माण कराया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कम वजन के कारण यदि गहनों का एक जोड़ा खराब हो जाए तो तुरंत दूसरे का इस्तेमाल किया जा सके।