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भक्तों के लिए खुशखबरी: महाकाल अन्नक्षेत्र दान हुआ अब ऑनलाइन, ऐसे मिलेगा भोग लगाने का मौका; जानें क्या करना है?

Wed, 29 Apr 2026 04:37 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

Baba Mahakaal: महाकाल मंदिर में ऑनलाइन दान कैसे करें? बुकिंग कब करनी होगी? क्या भक्त घर बैठे सालभर पहले तारीख तय कर सकते हैं? किस साइट पर आपको ये नई व्यवस्था मिलेगी, आइए जानते हैं। 

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बाबा महाकाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। अब मंदिर प्रशासन ने दान प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालु घर बैठे ही विभिन्न सेवाओं में सहयोग कर सकेंगे। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि मंदिर का अन्नक्षेत्र पूरी तरह दान पर आधारित है। यहां प्रतिदिन दो शिफ्ट में लगभग 10,000 श्रद्धालु भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं। पहले अन्य क्षेत्रों में दान की प्रक्रिया ऑफलाइन होने के कारण कई श्रद्धालु इस सेवा से जुड़ नहीं पाते थे, लेकिन अब इसे ऑनलाइन कर दिया गया है। अब भक्त मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट http://www.shrimahakaleshwar.mp,.gov.in के माध्यम से आसानी से दान कर सकेंगे। यह नई व्यवस्था सोमवार से लागू होगी।

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प्रतिदिन लगता है विशेष भोग
भगवान महाकालेश्वर को प्रतिदिन सुबह 10 बजे भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें गेहूं की रोटी, दाल-चावल और दो प्रकार की सब्जियां शामिल होती हैं। कई बार श्रद्धालु अपनी ओर से मिठाई भी अर्पित करते हैं, जिसे भोग में शामिल किया जाता है। भोग अर्पण के बाद ही अन्नक्षेत्र में भोजन प्रसादी का वितरण शुरू होता है।

भोजन प्रसादी के लिए निर्धारित दान राशि इस प्रकार है

  • दोनों समय के भोजन के लिए: 1,10,000 रुपये
  • एक समय के भोजन के लिए: 51,000 रुपये
  • मीठे प्रसाद के लिए: 21,000 रुपये

अब सालभर पहले से बुकिंग संभव
पहले श्रद्धालुओं को अन्नक्षेत्र पहुंचकर ही दान करना पड़ता था, लेकिन अब नई ऑनलाइन व्यवस्था के तहत वे पूरे साल में किसी भी तारीख के लिए अग्रिम बुकिंग कर सकेंगे। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य शुभ अवसरों पर भी भोजन प्रसादी का आयोजन कराया जा सकेगा।

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दानदाताओं को मिलेगा विशेष अवसर

मंदिर समिति के अनुसार, इस पहल से अधिक श्रद्धालु अन्नक्षेत्र सेवा से जुड़ेंगे और उन्हें एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव भी मिलेगा। दानदाताओं को भोग आरती के दौरान मंदिर में ले जाकर उनके हाथों से भगवान महाकाल को भोग अर्पित कराने की व्यवस्था की जाएगी।

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