Indore Water Crisis: शहर में अप्रैल में ही भीषण जलसंकट क्यों गहराया? नर्मदा पर निर्भरता के बावजूद 100 से ज्यादा कॉलोनियों में बोरिंग कैसे फेल हो गए? तालाबों का जलस्तर तेजी से क्यों गिर रहा है? क्या जल प्रबंधन की नाकामी इसकी वजह है? आइए जानते हैं।
इंदौर शहर में नर्मदा के चौथे चरण को लाकर अगले 50 वर्षों तक जलसंकट से राहत देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में हालात गंभीर बने हुए हैं। 100 से अधिक कॉलोनियों, बस्तियों और मोहल्लों में बोरिंग जवाब दे चुके हैं। कई जगह 300 फीट तक खुदाई के बावजूद पानी नहीं मिल रहा है। नलों में भी पानी का दबाव बेहद कम हो गया है।पहले ऐसे हालात आमतौर पर मई माह में बनते थे, लेकिन इस वर्ष अप्रैल में ही भीषण जलसंकट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तालाबों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। शहर में हरियाली भी कम होती जा रही है और जल पुनर्भरण (वाटर रिचार्जिंग) के प्रयास अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाए हैं।
नर्मदा जल नहीं पहुंचने वाले क्षेत्रों में अधिक संकट
सुपर कॉरिडोर, खंडवा रोड, मांगलिया और लसूडिया सहित कई इलाकों में स्थिति सबसे अधिक खराब है। यहां के निवासी निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं, जहां एक टैंकर का खर्च 600 से 800 रुपये तक पहुंच गया है। घनी बस्तियों में लोग सार्वजनिक बोरिंगों पर निर्भर हैं, लेकिन अब अधिकांश बोरिंग सूख चुके हैं या उनका जलस्तर बहुत कम हो गया है। चंदन नगर, बाणगंगा, गौरी नगर, खातीपुरा, जूनी इंदौर, खजराना सहित कई क्षेत्रों में लोग गंभीर जलसंकट झेल रहे हैं।
भूजल स्तर में असमानता और गिरावट
विशेषज्ञों के अनुसार शहर में भूजल स्तर असमान है कहीं कुछ फीट पर ही पानी मिल जाता है, तो कहीं 150 फीट तक भी पानी नहीं मिलता। अत्यधिक दोहन और अपर्याप्त पुनर्भरण के कारण स्थिति बिगड़ी है। शहर की लगभग 80 प्रतिशत सड़कों पर स्टॉर्म वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है, जिससे बारिश का पानी ड्रेनेज में बह जाता है। पूर्व राष्ट्रीय पेयजल सुरक्षा नोडल अधिकारी के अनुसार, जितना पानी निकाला जा रहा है, उतना रिचार्ज नहीं हो रहा, जिससे संकट बढ़ता जा रहा है।
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जलापूर्ति और प्रबंधन पर दबाव
नगर निगम के अनुसार, नर्मदा के तीनों चरणों से प्रतिदिन लगभग 500 एमएलडी पानी लिया जा रहा है। इसके अलावा यशवंत सागर से भी जलापूर्ति की जा रही है। टैंकरों के माध्यम से अतिरिक्त आपूर्ति की जा रही है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। नगर निगम का कहना है कि जल संकट को देखते हुए टैंकर व्यवस्था और आपूर्ति को और मजबूत किया जा रहा है।
जलसंकट के प्रमुख कारण