मध्य प्रदेश में आज से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू की गई है। गेहूं खरीदी हफ्ते में सोमवार से शुक्रवार के बीच ही की जाएगी। किसानों का सत्यापन करने के बाद खरीदी केंद्रों पर उपज खरीदी जाएगी। भुगतान आधार लिंक से खातों में होगा। 16 मई तक खरीदी चलेगी। इसके लिए किसानों को पहले से ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होंगे।
प्रदेश के भोपाल, सागर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में खरीदी होने जा रही है। इंदौर और उज्जैन संभाग के 15 जिलों में 28 मार्च से ही खरीदी की जाने लगी है। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए प्रदेश में 19 लाख 81 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। किसानों को पहले से ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होंगे। बुकिंग के 3 दिन के भीतर गेहूं बेचने सेंटर पर ले जाना होगा। वे अपनी तहसील के किसी भी सेंटर पर गेहूं बेच सकेंगे।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग के संचालक दीपक सक्सेना का कहना है कि प्रदेश में चार हजार 663 केंद्रों पर खरीदी का काम होगा। इस बार 130 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने की तैयारी की गई है। किसानों का बायोमैट्रिक सत्यापन करने की व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। एक लाख से ज्यादा पंजीयन और आधार नंबर में दर्ज नाम में अंतर आने पर सुधार कराया गया है। मोबाइल नंबर भी अपडेट किए हैं ताकि किसानों को एसएमएस के माध्यम से भुगतान आदि की सूचना दी जा सके।
प्रदेश की कई अनाज मंडियों में पिछले एक महीने से गेहूं की आवक हो रही है। किसानों को भाव भी ठीक मिल रहे हैं। वर्तमान में मंडियों में गेहूं की कीमत 2200 रुपये क्विंटल से ज्यादा है। सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपए तय किया है। ऐसे में किसान को बेहतर दाम मिलेंगे।
सरकार की तरफ से की गई हैं तैयारियां
खरीदी केंद्र पर गेहूं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ग्रेडिंग की व्यवस्था की गई है। तौल होने पर किसान एवं उपार्जन केंद्र प्रभारी के बायोमैट्रिक सत्यापन से ही देयक जारी होंगे। प्रत्येक खरीदी केंद्र पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है। उपर रखने के लिए 84 लाख मीट्रिक टन क्षमता की जगह रिक्त। 34 लाख मीट्रिक टन गेहूं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरित होगा, जिससे भंडारण की और जगह मिलेगी। ये भी तय किया गया है कि किसानों को परेशान न होना पड़े। प्लास्टिक के बारदाना में 50 किलो 135 ग्राम से अधिक गेहूं न तौला जाए। खरीदी केंद्रों पर बारदाना पर्याप्त रखे जाएं और परिवहन समय पर हो। किसानों का जेआईटी के माध्यम से भुगतान होगा। गर्मी को देखते हुए गोदामों में वॉटर कूलर और अन्य सेंटरों पर मटके रखे जाएं। पर्याप्त शेड हो, ताकि किसान गेहूं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां या अन्य वाहन खड़े कर सके।