11 दिसंबर का दिन बेहद खास है। पिछले साल इसी दिन यानी 11 दिसंबर 2017 को राहुल गांधी की ताजपोशी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में हुई थी। इस एक साल में पार्टी ने जबरदस्त तरीके से कमबैक करते हुए पहले कर्नाटक और अब भाजपा की तीन किलों को लगभग ढहा दिया है।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश ही ऐसा राज्य है, जहां से अंतिम समय तक भाजपा को उम्मीद थी। लेकिन दोपहर बाद आए नतीजों से ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो इस प्राचीर पर भी कांग्रेस का झंडा फहराने वाला है।
मध्यप्रदेश में बहुमत के लिए 116 का नंबर चाहिए। रुझानों में अभी तक कांग्रेस को 119 सीटें मिली हैं और बीजेपी को 100, यदि नतीजे इन नंबरों के आसपास रहे यह आप भी समझ रहे होंगे कि तो तस्वीर क्या बनने वाली है। कई सालों बाद एक बार फिर मध्यप्रदेश में अन्य दलों को भी निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर मिलने जा रहा है।
हालांकि त्रिशंकु विधानसभा बनने की स्थिति में मायावती और निर्दलीय विधायक किंगमेकर की भूमिका में होंगे। इस बीच मौके की नजाकत को समझते हुए भाजपा के प्रमुख नेताओं के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने घर पर एक बैठक कर रहे हैं, जिसमें आगे की रणनीति पर मंथन किया जा रहा है।
यह तो तय है कि भाजपा घटते-बढ़ते आंकड़ों को देखकर जोड़-तोड़ करके सरकार बनाने की तैयारी भी कर सकती है। भाजपा की पूरी कोशिश होगी कि निर्दलीय विधायकों को अपने साथ मिला लिया जाए।