मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर परिपालन रिपोर्ट केंद्र की ओर से पेश की गई। रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि कागजी रिपोर्ट और निर्देश बहुत हुए। पीड़ितों के इलाज के लिए केंद्र सरकार ने क्या निर्णय लिया है, यह तीन हफ्ते में बताइए। अगर संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो हम आदेश दे देंगे कि मरीज प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज करवाए। सरकार पैसा चुकाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन एवं अन्य की याचिका पर फैसला सुनाया था। भोपाल गैस पीडितों के उपचार और पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी को हर तीन महीने में रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने पेश करने को कहा गया था। रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट को राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने थे।
इस दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की बातों की भी राज्य सरकार ने अनसुनी कर दी तो अवमानना याचिका भी दाखिल हुई थी। उसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का केंद्र और राज्य सरकारों ने पालन नहीं किया है। गैस पीडितों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। अस्पतालों में अवश्यकता के अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। बीएमएचआरसी के भर्ती नियमों की वजह से डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ स्थाई तौर पर सेवाएं प्रदान नहीं कर पा रहे हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथा और अधिवक्ता राजेश चंद्र उपस्थित हुए।
प्राइवेट अस्पतालों में करवा रहे हैं इलाज
इससे पहले हाईकोर्ट ने गैस पीड़ितों के उपचार के संबंध में वास्तविक स्थिति जानने के लिए केंद्र के अतिरिक्त सचिव, प्रदेश सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी, भोपाल गैस राहत एव पुनर्वास विभाग तथा एमसीआई के एक-एक प्रतिनिधि को लेकर कमेटी बनाई थी। मॉनिटरिंग कमेटी के आवेदन में कहा गया था कि गैस पीड़ित कैंसर मरीजों के साथ ही अन्य बीमारियों का भी उपचार अस्पताल में नहीं मिल पा रहा है। उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाना पड रहा है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को कमेटी की रिपोर्ट देखने के बाद नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम यह आदेश पारित कर दें कि पीड़ित अपनी मर्जी से किसी भी अस्पताल में उपचार करवाए, उनका खर्च सरकार उठाएगी।