गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी केपी यादव ने 125549 वोट के अंतर से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया को हरा दिया है। 17 साल में चार लोकसभा चुनाव जीत चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा को इस बार तगड़ा झटका लगा है। बता दें ये सीट सिंधिया घराने की परंपरागत सीट है। केपी यादव पूर्व में सांसद प्रतिनिधि रहे हैं।
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ऐसे चला वोटिंग राउंड
मतगणना शुरू होते ही कुछ देर तक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बढ़त बनाए रखी, लेकिन थोड़ी ही देर बाद वे पीछे चले गए। करीब साढ़े 12 बजे तक सिंधिया भाजपा उम्मीदवार से 53 हजार वोटों से से पीछे चल रहे थे। इस दौरान केपी यादव ने आरोप भी लगाया कि गुना विधानसभा क्षेत्र के परिणामों की जानकारी नहीं दी जा रही है। रिटर्निग ऑफिसर 1 घंटे से गायब है। हमने कलेक्टर से इसकी शिकायत की थी।
12 मई को हुआ था मतदान
गुना लोकसभा सीट पर 12 मई को छठवें चरण में मतदान हुआ था। इस बार रिकॉर्ड 69.89 प्रतिशत मतदान के साथ 13 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई थी। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां पर 60.05 फीसदी वोटिंग हुई थी और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जीत दर्ज की थी।
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ये भी थे चुनाव मैदान में
गुना-शिवपुरी सीट पर कांग्रेस के सिंधिया और भाजपा के यादव के अलावा बहुजन समाज पार्टी के धाकड़ लोकेंद्र सिंह राजपूत, अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया के अमित खरे, आजाद भारत पार्टी से रेखा बाई, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से संतोष यादव और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया से मनीष श्रीवास्तव भी चुनाव मैदान में थे। इनके अलावा अजय सिंह कुशवाहा, चंद्र कुमार श्रीवास्तव, भान सिंह, भूपेंद्र सिंह चौहान, ओपी भेया, हरभजन सिंह राजपूत बतौर निर्दलीय उतरे थे।
गुना-शिवपुरी सीट का ऐसा रहा है इतिहास
इस सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ था, तब कांग्रेस के टिकट पर विजयाराजे सिंधिया जीते थे। उन्होंने हिंदू महासभा के वीजी देशपांडे को हराया था। इसके अगले चुनाव में कांग्रेस के रामसहाय पांडे मैदान में उतरे और हिंदू महासभा के वीजी देशपांडे को शिकस्त दी।
1967 के उपचुनाव में कांग्रेस को हार मिली और स्वतंत्रता पार्टी के जेबी कृपलानी जीते। इसी साल हुए आम चुनाव में स्वतंत्रता पार्टी से कांग्रेस की पूर्व नेता विजयाराजे सिंधिया लड़ीं, उन्होंने कांग्रेस के डीके जाधव को हराया। शुरुआती दो चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस को लगातार 3 हार मिलीं। इसके बाद 1971 में विजयाराजे के बेटे माधवराव सिंधिया ने जनसंघ के टिकट पर चुनाव जीता।
1977 के चुनाव में वह यहां से निर्दलीय लड़े और 80 हजार वोटों से बीएलडी के गुरुबख्स सिंह को हराया। इसके बाद माधवराव सिंधिया 1980 में कांग्रेस के टिकट पर लड़े और जीते। वे यहां से लगातार 3 चुनाव जीते। 1989 के चुनाव में यहां से विजयाराजे सिंधिया एक बार फिर लड़ीं और कांग्रेस के सांसद महेंद्र सिंह को शिकस्त दी। इसके बाद से विजयाराजे सिंधिया ने यहां लगातार 4 चुनाव जीते। कांग्रेस को कमजोर होता देख 1999 में माधवराव एक बार फिर इस सीट से चुनाव लड़े और कांग्रेस की वापसी कराई।
2001 में उनके निधन के बाद 2002 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया लड़े और जीते। इसके बाद से ज्योतिरादित्य जीतते आ रहे थे। साल 2014 में भी मोदी लहर के बावजूद वे अपनी सीट बचाने में सफल रहे। कांग्रेस यहां 9 बार तो बीजेपी को 4 बार जीती है, जबकि 1 बार जनसंघ को जीत मिली। गुना लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें हैं, जिनमें शिवपुरी, बमोरी, चंदेरी, पिछोर, गुना, मुंगावली, कोलारस, अशोक नगर विधानसभा सीटें शामिल हैं। आठों विधानसभा में से 4-4 पर भाजपा-कांग्रेस का कब्जा है।
ऐसा रहा है जनादेश
साल 2009 के चुनाव में भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को 4 लाख 13 हजार 297 (63.6 फीसदी) वोट मिले थे। वहीं नरोत्तम मिश्रा को 1 लाख 63 हजार 560 (25.17 फीसदी) वोट मिले थे। सिंधिया ने 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे। वहीं बसपा 4.49 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी। चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 में गुना में कुल 16 लाख 05 हजार 619 मतदाता थे, जिसमें से 7 लाख 48 हजार 291 महिला मतदाता और 8 लाख 57 हजार 328 पुरुष मतदाता थे।