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पुत्तर प्रदेश बन गया है मध्य प्रदेश

Sat, 16 Nov 2013 01:26 AM IST
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल
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मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बड़े नेताओं के नाते-रिश्तेदारों ने राजनीतिक विरासत की कमान संभाल ली है। जिस तरह से पुत्रों को टिकट दिए गए हैं, उससे मध्य प्रदेश को भी पुत्तर प्रदेश कहा जा सकता है।
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राजपरिवारों के अलावा नेता भी अपने पुत्रों को अपनी राजनीतिक विरासत सौंपने में बड़ी दिलचस्पी ले रहे हैं। हालांकि इनमें से कई लोगों ने राजनीति में काफी वक्त बिताया है।

सुरेंद्र पटवा
पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा भोजपुर से एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने कांग्रेसी दिग्गज सुरेश पचौरी हैं। सुरेंद्र पटवा के लिए अब सीट आसान नहीं रही।
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दीपक जोशी
पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी हाट पीपल्या से दोबारा मैदान में हैं। दीपक जोशी को टिकट देने से पहले स्थानीय लोगों ने भाजपा मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया था।

शरदेंदु तिवारी
शरदेंदु समाजवादी नेता चंद्र प्रताप तिवारी के बेटे हैं और उनका मुकाबला कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह के साथ है। शरदेंदु उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

सुंदरलाल तिवारी
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवासी तिवारी के बेटे सुंदरलाल तिवारी पहले लोकसभा में सदस्य रहे हैं। अब गुढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट भाजपा के पास थी।

विवेक तिवारी
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवासी तिवारी के नाती विवेक तिवारी का मुकाबला सिरमौर में रीवा के राजकुमार दिव्यराज सिंह से है। वह जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे हैं।

राहुल सिंह
उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह का मुकाबला चंदादेवी गौर से है। पहले यह सीट भारतीय जनशक्ति पार्टी के अजय यादव ने 1000 वोट के मामूली अंतर से जीती थी। सागर जिले के पार्टीजनों ने राहुल सिंह की उम्मीदवारी का विरोध किया था।

अनूप मिश्रा
अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा पहले ग्वालियर पूर्व से विधायक थे, अब भितरवार सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां कड़ा संघर्ष हो रहा है।

सचिन यादव
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष यादव के बेटे सचिन यादव कसरावद से विधानसभा चुनाव के मैदान में है। उनके बड़े भाई अरुण यादव पहले खरगौन सीट से लोकसभा के सदस्य हैं।

रजनीश सिंह
पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष हरबंस सिंह के बेटे रजनीश सिंह को केवलारी सीट विरासत में मिल गई है। हरबंस सिंह यहां से विधायक थे। रजनीश का मुकाबला ढाल सिंह बिसेन से है।

अशोक रोहाणी
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के बेटे अशोक रोहाणी को अपने पिता के आकस्मिक निधन के बाद चुनाव मैदान में उतरना पड़ा।

मुकामसिंह किराडे
शिवराज सरकार में मंत्री रंजना बघेल के पति मुकामसिंह किराड़े अभी कुक्षी से विधायक भी हैं और चुनाव के मैदान में एक बार फिर उतर गए हैं।

नीना वर्मा
विक्रम वर्मा की पत्नी धार से विधानसभा चुनाव लड़ी थीं और उन्हें कांग्रेस के बालमुकुंद गौतम के मुकाबले एक वोट से विजयी घोषित किया गया था। अदालत ने गौतम को विजयी घोषित कर दिया।

रेखा वर्मा
सज्जन सिंह वर्मा की पत्नी रेखा वर्मा देवास से तुकोजीराव पवार के मुकाबले में खड़ी हैं। देवास विधानसभा सज्जन वर्मा के संसदीय क्षेत्र में आती है।

अजीत बोरासी
प्रेमचंद गुड्डू के बेटे अजीत बौरासी ने भी आलोट सीट से फार्म भरा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी का नामांकन खारिज हो गया। अब बौरासी आलोट से चुनाव लड़ रहे हैं।

जयवर्धन सिंह
दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह राघौगढ़ से चुनाव के मैदान में है। वह पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं और दिग्विजय सिंह ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दिया है।

भुवनेश्वर सिंह
अर्जुन सिंह के दामाद भुवनेश्वर सिंह को कांग्रेस ने सिंगरौली से विधानसभा चुनाव मैदान में उतारा है। उनके मुकाबले में भाजपा के रामलल्लू वैश हैं, जो बड़े अंतर से 2008 में चुनाव जीते थे।
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