मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए तलाक सहित मुस्लिम वैवाहिक विवादों की सुनवाई मस्जिद कमेटी द्वारा जारी है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने भोपाल मस्जिद कमेटी के सचिव एवं भोपाल शहर के काजी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। इन्हें एक नोटिस जारी कर पूछा गया है कि अदालत की रोक के बावजूद भी वे तलाक सहित मुस्लिम वैवाहिक विवादों की सुनवाई जारी क्यों रखे हुए हैं।
याचिकाकर्ता के वकील मोहम्मद आदिल उस्मानी ने मंगलवार को बताया कि हाईकोर्ट ने भोपाल मस्जिद कमेटी के सचिव एसएम सलमान और दारुल कजा मस्जिद कमेटी काजी मुश्ताक अली नदवी को अवमानना मामले में 19 फरवरी (बुधवार) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति संजय यादव और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने सोमवार को इन दोनों को तलब कर यह स्पष्ट करने को कहा कि अदालत के आदेशों के बावजूद वे मुस्लिम समुदाय के तलाक और गुजारा भत्ता सहित वैवाहिक विवादों की सुनवाई क्यों जारी रखे हुए हैं।
उस्मानी ने कहा कि अदालत ने यह निर्देश भोपाल स्थित सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद वसीम खान द्वारा इन दोनों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में मोहम्मद जहीर खान कोटी की जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मस्जिद कमेटी भोपाल एवं दारुल कजा मस्जिद कमेटी भोपाल को मुस्लिम समुदाय के वैवाहिक विवादों की सुनवाई से प्रतिबंधित करने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन यह कमेटी वैवाहिक विवादों की सुनवाई जारी रखे हुए है जिसके कारण सामाजिक कार्यकर्ता खान ने इन दोनों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी।