भाजपा ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन भी पार्टी ने उन क्षेत्रों को फोकस किया, जहां से सीन बनना या बिगड़ना है। अमित शाह मालवा-निमाड़ में रहे तो उमा भारती को बुंदेलखंड भेजा गया। स्मृति ईरानी विंध्य में रहीं और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह अपनी ससुराल शहडोल भेजे गए, ताकि आसपास की सीटों पर सकारात्मक माहौल बने।
पूरे चुनाव अभियान को देखें तो भाजपा ने गुजरात की तरह मध्यप्रदेश में भी बढ़त बनाकर रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 10 चुनावी रैलियां कराईं। अमित शाह ने कुल 21 दिन दिए। राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज से लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल के तमाम सदस्यों ने धुंआधार प्रचार किया। उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की दर्जनों सभाएं कराईं।
हेमा मालिनी, परेश रावल और मनोज तिवारी समेत संगठन के भी कई पदाधिकारियों को भेजा। बीजेपी के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन चुनावी राजनीति में 'कारपेट बॉम्बिंग' का शब्द लेकर आए थे, भाजपा ने फील्ड से लेकर मीडिया तक वही किया।
दूसरी ओर अपने भविष्य के लिए लड़ रही कांग्रेस ने कमजोर संसाधनों के बावजूद किला फतह करने के लिए पूरा जोर लगाया। कुछ दिनों के अंतराल से राहुल गांधी ने कई दौरे किए, सॉफ्ट हिंदुत्व का प्रदर्शन किया, रोड शो किए और करीब दो दर्जन सभाएं कीं। प्रचार के लिए बड़े नेताओं को भेजा गया, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी आए।
राजबब्बर, नवजोत सिंह सिद्धू की ड्यूटी लगाई तो नगमा व अमीषा पटेल भी आईं। बावजूद इसके कांग्रेस को अंदेशा है, लिहाजा वह अगले दो दिन और उसके बाद ईवीएम की रखवाली तक कोई जोखिम मोल लेना नहीं चाहती।