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मध्यप्रदेश : अगले सत्र से केवल संस्कृत भाषा में शिक्षा देने वाले प्ले स्कूल की योजना, शिक्षाविदों ने उठाए सवाल

Wed, 23 Dec 2020 01:12 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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स्कूल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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मध्यप्रदेश स्कूली शिक्षा विभाग ऐसे पहले प्ले स्कूल खोलने जा रहा है, जहां केवल संस्कृत में शिक्षा दी जाएगी। अगले शैक्षणिक सत्र से हर जिले में  ऐसे प्ले स्कूल खोले जाएंगे। राज्य के शिक्षा मंत्री ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी।

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एलकेजी-यूकेजी का नाम होगा अरुण-उदय
इन स्कूलों में एलकेजी और यूकेजी कक्षा के बच्चों को मात्र संस्कृत भाषा में ही बोलना, शिष्टाचार, श्लोक और अलग-अलग वस्तुओं के नाम सिखाए जाएंगे। विभागीय मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि एलकेजी और यूकेजी की जगह इन कक्षाओं का नाम अरुण और उदय रखा जाएगा। 

हर जिले में सरकारी स्कूल को ऐसे विकसित किया जाएगा कि वहां छात्रों को संस्कृत पढ़ाई जाए। संस्कृत हर भाषा की जननी है। संस्कृत सीखने से बच्चों का दिमाग खुल जाएगा। संस्कृत भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का भी प्रचार करेगी। मंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश स्टेट ओपन स्कूल एजुकेशन बोर्ड और योग गुरू बाबा रामदेव का महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान प्ले स्कूलों में पाठ्यक्रम, बुनियादी ढांचा और नियुक्तियों का ध्यान रखेगा।
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शिक्षाविदों ने उठाए सवाल
सरकार के इस फैसले पर सवालिया निशान खड़े करते हुए शिक्षाविद् पंकज प्रजापति ने कहा कि मुझे इस परियोजना की व्यवहार्यता पर गंभीर संदेह है। उन्होंने कहा कि कोई माता-पिता अपने बच्चों को संस्कृत स्कूल में क्यों भेजेंगे अगर वो अपने बच्चों को पुजारी या संस्कृत के व्याख्यता के तौर पर नहीं देखना चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ये अच्छी बात है कि बच्चों को अतिरिक्त भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए लेकिन सिर्फ एक ही भाषा (संस्कृत) पर अगर जोर दिया जाएगा, जो हिंदू अनुष्ठान करने के लिए पुजारी द्वारा इस्तेमाल की जाती है तो यह बात थोड़ी असंवेदनशील लगती है।

'संस्कृत केवल पुजारियों की भाषा नहीं है'
उन्होंने आगे कहा कि ये बच्चे अपने माता-पिता से बातचीत कैसे कर सकेंगे, जब उनके माता-पिता को ही संस्कृत का ज्ञान नहीं होगा। वहीं महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के डायरेक्टर पीआर तिवारी, जिन्होंने विभाग को इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव भेजा था, उनका कहना है कि समस्या यही है कि संस्कृत भाषा को पुजारियों की भाषा मान लिया गया है।

उन्होंने कहा कि ये लोगों के साथ समस्या है कि वो संस्कृत भाषा को सिर्फ पुजारी से जोड़ते हैं। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, क्योंकि संस्कृत बोलते समय तालु, दांत, जीभ, होंठ और नाक, इन सभी का इस्तेमाल किया जाता है। ये सिर्फ एक भाषा नहीं है बल्कि यह बोलने के तरीके को विकसित करती है।

'संस्कृत से दूसरी भाषाएं सीखना होगा आसान'
उन्होंने आगे कहा कि अगर बच्चे संस्कृत भाषा का इस्तेमाल करने लग जाएंगे तो उनके लिए दूसरी भाषाओं को सीखना आसान हो जाएगा। इसमें फ्रेंच, स्पेनिश और दूसरी भाषाएं शामिल हैं। अरुण और उदय कक्षाओं में हम सब चीजें सिखाएंगे लेकिन सिर्फ संस्कृत भाषा में। लिखने से ज्यादा हम बोलने पर जोर देंगे। हिंदी और अंग्रेजी जैसी भाषाओं को कक्षा एक से लागू किया जाएगा।

संस्कृत कॉलोनी बनाएंगे
इसके अलावा राज्य सरकार ने हर जिले में एक कॉलोनी को संस्कृत कॉलोनी के रूप में विकसित करने की बात कही है, यहां साइन बोर्ड्स, नेमप्लेट आदि संस्कृत भाषा में लिखे होंगे।

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