कमलनाथ के सम्मान समारोह के दौरान ओबीसी वर्ग के एक नेता को सिक्योरिटी गार्ड्स ने धक्का देकर नीचे उतार दिया था।
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मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए श्रेय की लड़ाई चल रही है। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ का ओबीसी संगठनों ने मंगलवार को सम्मान किया। उन्हें ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण देने का श्रेय दिया गया। सम्मान समारोह के दौरान सिक्योरिटी गार्ड ने कांग्रेस के ही एक ओबीसी नेता को मंच से नीचे उतार दिया। अब इस मसले को लेकर भाजपा कांग्रेस पर हमलावर बनी हुई है।
प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के विभिन्न संगठनाें की तरफ से मंगलवार को मानस भवन में कमलनाथ का सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। इसमें कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और राजधानी के यादव समाज के अध्यक्ष रामश्वरूप यादव भी पहुंचे थे। सिक्योरिटी गार्ड ने मंच पर बढ़ती भीड़ के चलते यादव समेत अन्य कार्यकर्ताओं को नीचे उतार दिया। इस पर भाजपा प्रवक्ता नेहा बग्गा ने कहा कि इस घटना से साफ है कि कमलनाथ की ओबीसी के प्रति नफरत की दृष्टि है। यहीं कारण है कि राजधानी में यादव समाज के अध्यक्ष और कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव रामस्वरूप यादव को उन्होंने अपनी घृणा और नफरत से छोटा दिखाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड से मंच से उतार दिया। यह ओबीसी वर्ग को नीचा दिखाने का काम किया है।
हालांकि, जिन नेता को उतारे जाने को लेकर भाजपा ने निशाना साधा, वह ही भाजपा पर हमला करते नजर आए। रामस्वरूप यादव ने कहा कि वह मंच पर कमलनाथ जी का सम्मान करने गए थे। उन्हें मंच से नीचे उतारने जैसा कुछ नहीं है। भाजपा झूठ फैला रही है। कमलनाथ जी ने पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया है। इसे भाजपा पचा नहीं पा रही है। इस वजह से बेवजह की बात कर रही है। वहीं, पिछड़ा वर्ग विकास माेर्चा के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह ने कहा कि कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा। प्रदेश भर से आए पदाधिकारियों ने कमलनाथ जी का सम्मान किया। कमलनाथ जी ने 1983 में महाजन आयोग की अनुशंसाओं को वर्ष 2019 में लागू किया था।
कमलनाथ का सम्मान करते ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधि।
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आरक्षण देकर हमने अहसान नहीं किया
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सम्मान अवसर पर कहा कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देकर हमने कोई अहसान नहीं किया। यह तो उनका हक है। हमने व्यवस्था की है कि 70% रोजगार स्थानीय लोगों को मिले। इसका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इसके लिए कानून बनाया जाना चाहिए। भाजपा घोषणाओं की राजनीति करती है। पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में चुप्पी साध ली थी। उन्होंने कहा कि भाजपा घोषणाएं करने के बाद पाकिस्तान, चीन, समाज और राम मंदिर में बांटने लगते है। हम सभी धर्म प्रेमी हैं। राम मंदिर भी चाहते है, लेकिन इस विषय पर राजनीति नहीं करते।
अपने पैसों से कराया कमलनाथ ने सम्मान
इससे पहले प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री और भाजपा नेता विश्वास सारंग ने सम्मान समारोह पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि ओबीसी आरक्षण में टांग अड़ाने का काम कांग्रेस और कमलनाथ ने किया था। उन्हें उसी मंच से खेद जताना चाहिए। वे उस मंच से ओबीसी वर्ग से क्षमा मांगे कि जब पंचायत चुनाव हो रहे थे तब उन्होंने और उनकी पार्टी के नेताओं ने ओबीसी आरक्षण के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई। इस कारण पंचायत चुनाव नहीं हो सके। अब खुद के पैसे से माला खरीदना और खुद के गले में डलवाना ऐसी राजनीति प्रदेश में नहीं चलेगी। कमलनाथ और कांग्रेस ने तो ओबीसी वर्ग समेत सभी वर्गों पर केवल कुठाराघात ही किया है।