मध्यप्रदेश: झाबुआ में दो भूरिया की लड़ाई में जाति बनी बड़ा मुद्दा, भीली भाषा में क्यों प्रचार कर रहे सियासी दल
सार
आजादी के बाद चुनाव होते रहे, लेकिन 1967 से बापू सिंह डामोर ऐसे कांग्रेसी नेता थे, जो झाबुआ चुनाव जीतने में कामयाब होते रहे। अंतिम चुनाव 1993 में डामोर ने लड़ा और जीता। इसके बाद हर चुनाव में उम्मीदवार दोनों प्रमुख पार्टी के भले ही बदलते रहे, लेकिन भोपाल विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ने का मौका किसी भी विधायक को दूसरी बार नहीं मिला...
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- फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar