तीन नवंबर को मतदान से पहले तक ग्वालियर के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं को खुद फोन करके समर्थन देने और जी-जान से जुटने की अपील की थी। इंटर कालेज के अध्यापक और अपने करीबी को भी महाराज ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर होने का हवाला देकर जुट जाने को कहा। लेकिन सिंधिया के करीबी सूत्रों को भी सबकुछ ठीक हो पाने का भरोसा कम है। भाजपा के एक पूर्व राज्यसभा सांसद का भी कहना है कि ज्योतिरादित्य में अकड़ ज्यादा है। हालांकि सूत्र का कहना है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कड़ी मेहनत करके काफी हद तक उपचुनाव को संभाल लिया है।
पूर्व राज्यसभा सांसद का कहना है कि वह ग्वालियर के महाराज की प्रतिष्ठा बचने न बचने के बारे में कुछ नहीं जानते। उन्हें केवल इतना पता है कि उपचुनाव में भाजपा और भाजपा की मध्यप्रदेश सरकार को कोई खतरा नहीं है। भाजपा की प्रतिष्ठा पर भी कोई आंच नहीं आ रही है। वरिष्ठ नेता का कहना है कि सिंधिया अब भाजपा के नेता हैं और पार्टी का सम्मान ही उनका सम्मान है।
भाजपा के लिए खोटा सिक्का साबित होंगे सिंधिया
कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मध्यप्रदेश में भाजपा के लिए सिंधिया खोटा सिक्का साबित होंगे। पार्टी की आईटी सेल के प्रभारी रोहन गुप्ता कहते हैं कि राज्य में ग्वालियर चंबल संभाग की ज्यादातर सीटें कांग्रेस की झोली में वापस में आ रही हैं। केपी सिंह जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को काफी उम्मीद है। पार्टी के भिंड से कभी सिंधिया के समर्थक रहे नेता का कहना है कि 16 सीटों में 15 और 28 सीटों में 25 सीटें कांग्रेस की झोली में आने जा रही हैं। रोहन गुप्ता तो यहां तक कहते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के लिए खोटा सिक्का साबित होंगे। रोहन ने कहा कि इस बारे में मेरा बोलना ठीक नहीं है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही कह चुके हैं कि सिंधिया को भाजपाई बनने में समय लगेगा।