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फातिमा रसूल सिद्दीकी: मध्यप्रदेश में भाजपा की इकलौती मुस्लिम उम्मीदवार इसलिए भी खास हैं

Tue, 27 Nov 2018 01:53 PM IST
Trainee Trainee चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इन चुनावों में फातिमा रसूल सिद्दीकी पर होगी सबकी नजर - फोटो : Facebook
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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव। कुल 230 सीट। भाजपा ने इन 230 सीटों में से सिर्फ एक सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया है। वो सीट है- भोपाल उत्तर। और उम्मीदवार हैं फातिमा रसूल सिद्दीकी। लेकिन, क्या ये इतना ही सीधा-सादा है जितना जानकारी के तौर पर दिखता है। बिल्कुल नहीं। ये पेचीदा है और इसकी पड़ताल इसी वजह से जरूरी भी हो जाती है। 
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कुछ सवाल हैं। सिर्फ एक मुस्लिम को टिकट क्यों? फातिमा रसूल क्यों? भोपाल उत्तर सीट ही क्यों? क्या ये सीट एक प्रयोगशाला है जिसमें कुछ परखनलियां फिट की गई हैं? राजनीति के रसायनों में घुलकर, वोटों की ताप से मिलकर, हो सकता है भाजपा को कुछ नया ही हासिल हो जाए। आइए, एक-एक कर करते हैं इस सबकी पड़ताल। 

230 में से बस एक मुस्लिम उम्मीदवार मिला?

इस मामले में भाजपा ने पिटीपिटाई लकीर को एक बार और पीट दिया है। 2013 में भी पार्टी को सिर्फ एक मुस्लिम उम्मीदवार मिल पाया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ बेग को पार्टी ने टिकट दिया लेकिन वो चुनाव हार गए। ऐसे में देखा जाए तो नया कुछ भी नहीं। पार्टी को लगता है कि इस सीट पर गैर-मुस्लिम चेहरा उतारने का उसे शायद फायदा नहीं होगा। हालांकि 2008 में वो आज के मेयर आलोक शर्मा को उतार चुकी है। तब आलोक भी हार गए थे।

'भोपाल उत्तर' क्यों?

भोपाल जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं। इनमें भी भोपाल उत्तर एक ऐसी सीट है जिस पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है। 2 लाख 34 हजार मतदाताओं वाले विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटर करीब 50 फीसदी बताए जाते हैं। 1993 के अपवाद को छोड़ दिया जाए तो पिछले 30 साल से इस सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार की ही जीत होती रही है। याद रहे, 1993 का चुनाव, बाबरी ढांचे के गिरने के बाद हुआ था।
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फातिमा रसूल सिद्दीकी की ही क्यों?

इन चुनावों में फातिमा रसूल सिद्दीकी पर होगी सबकी नजर - फोटो : Social Media
अब आते हैं सबसे दिलचस्प सवाल पर। भाजपा ने फातिमा को क्यों चुना इससे ज्यादा ये सवाल उठ रहा है कि फातिमा ने भाजपा को क्यों चुना। जिस दिन उन्हें पार्टी ने भोपाल उत्तर से टिकट दिया, उससे महज एक दिन पहले वो कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुईं।
फातिमा रसूल सिद्दीकी...इस नाम में एक और गूंज, एक और इतिहास छिपा है। उनके पिता का। रसूल सिद्दीकी, जो पूरी तरह कांग्रेसी थे। इसी सीट से जीते। 1980 और 90 के दशक में कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे। माधवराव सिंधिया के दोस्त रहे।
तो फिर ऐसा क्या हुआ कि फातिमा भाजपा के खेमे में चली गईं। बीते कुछ दिनों में उनसे ये सवाल कई बार, कई तरह से पूछा गया। ज्यादातर बार उनका जवाब रहा कि अब कांग्रेस पार्टी में पहले जैसी बात नहीं रही। 
निकालने वाले इसके कई मायने निकाल सकते हैं और शायद निकालेंगे भी। लेकिन फातिमा ने अपना मन बनाया और भाजपा से टिकट मिलने के बाद जोर-शोर से प्रचार में जुट गईं।

क्या 'भोपाल उत्तर' एक प्रयोगशाला है?

यूं तो भाजपा कभी बहुत मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए नहीं जानी जाती। लेकिन भोपाल उत्तर सीट अब एक प्रयोगशाला बनती नजर आ रही है। 2019 की प्रयोगशाला। भाजपा की फातिमा रसूल सिद्दीकी के सामने हैं दिग्गज उम्मीदवार कांग्रेस के आरिफ अकील। उनके दम का अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि वो 1998 से 2013 विधानसभा चुनाव तक कभी हारे नहीं हैं। हिंदू और मुस्लिम, दोनों में उनकी अच्छी पैठ बताई जाती है। हालांकि, चार बार की एंटी इन्कंबेंसी उनके खिलाफ भी खड़ी है। 

राजनीति के पंडितों का मानना है कि भाजपा इस दांव को प्रयोग के तौर पर देख रही है। खुद, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके चुनाव कार्यालय का उद्घाटन किया। ट्रिपल तलाक मुद्दे और आम तौर पर मुस्लिम महिलाओं के लिए काम करने की जो छवि भाजपा ने पिछले कुछ वक्त में बनाई है, उसे लगता है कि फातिमा को इसका पूरा फायदा मिलेगा। अगर फातिमा, आरिफ अकील को हराने में कामयाब हो जाती हैं, तो भाजपा 2019 लोकसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने के फॉर्मूले को आगे बढ़ा सकती है। 

इस सीट पर आम से लेकर खास सबकी नजर रहने वाली है। अगर फातिमा ने अकील को हराकर इतिहास रचा तो इसे मध्यप्रदेश चुनाव के सबसे बड़े उलटफेरों में गिना जाएगा। 
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