साध्वी प्रज्ञा-दिग्विजय सिंह
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मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पैदा हुई 48 वर्षीय प्रज्ञा की पहचान भगवा वस्त्र, छोटे बाल और रुद्राक्ष की माला है। इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट प्रज्ञा का आरएसएस से लंबा जुड़ाव रहा है। युवा अवस्था में संन्यास लेने वाली प्रज्ञा ने एबीवीपी व दुर्गा वाहिनी के साथ भी काम किया।
उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर एमपी के एक भाजपा विधायक ने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे प्रज्ञा ने ठुकरा दिया था। मालेगांव विस्फोट में जेल में रहने के दौरान उन पर मकोका भी लगा। जेल में ही उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हो गया, जिसका लखनऊ में ऑपरेशन हुआ। प्रयागराज महाकुंभ में साध्वी प्रज्ञा को भारत भक्ति अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर बनाया गया था।
संघ के धुर विरोधी दिग्विजय अब राम की शरण में
दिग्विजय सिंह अपने बयानों की वजह से अक्सर भाजपा के निशाने पर रहते हैं। हालांकि इन दिनों वह बदले-बदले नजर आ रहे हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल संघ कार्यालय के सामने से सुरक्षा हटाई तो संघ के धुर विरोधी रहे दिग्विजय ने इसका ट्विटर पर विरोध किया। इसके बाद सुरक्षा दोबारा लगा दी गई। बीते दिनों दिग्विजय ने भोपाल में कांग्रेस दफ्तर की जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को देने की भी घोषणा की।
javed akhtar, sadhvi pragya
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''भोपाल के लिए भाजपा का चयन एकदम निष्कलंक है। साध्वी प्रज्ञा संघ परिवार के विचारों और कामों का बिल्कुल सही मूर्त रूप हैं। वाह! वाह!! वाह!!!''
- जावेद अख्तर, लेखक, फिल्मकार
''भाजपा से और क्या उम्मीद की जा सकती है। इससे ज्यादा मैं और क्या कहूं।''
- गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस
''भगवा आतंक’ शब्द दिग्विजय सिंह ने ही गढ़ा था। इसीलिए पार्टी ने इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाना तय किया और साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से उतारा है। समझौता एक्सप्रेस विस्फोट में स्वामी असीमानंद सहित ऐसे कई आरोपी बरी हो चुके हैं, जनता कांग्रेस और राहुल गांधी को सजा देगी।''
-अमित शाह, अध्यक्ष भाजपा
- 21% ग्रामीण, बाकी शहरी
- 14.83% अनुसूचित जाति
- 2.56% अनुसूचित जनजाति
- 75 से 80% हिंदू
- 20 से 25%मुस्लिम
1984 के बाद नहीं जीती कांग्रेस
भोपाल में कांग्रेस आखिरी बार 1984 में जीती थी। 1989, 1991, 1996 और 1998 में पूर्व मुख्यसचिव सुशील चंद्र वर्मा भाजपा सांसद बने। 1999 में उमा भारती, 2004 व 2009 में कैलाश जोशी और 2014 में आलोक संजर जीते।
वर्ष विजयी अंतर
2014 भाजपा 3.70 लाख
2009 भाजपा 65 हजार
2004 भाजपा 3.06 लाख
1999 भाजपा 1.68 लाख
आठ विस सीटों में पांच भाजपा के पास 2018 के विधानसभा चुनाव में भोपाल लोकसभा क्षेत्र में आने वाली आठ विस सीटों में से पांच भाजपा और तीन कांग्रेस ने जीती थीं। भाजपा को यहां कांग्रेस से करीब 11 फीसदी ज्यादा वोट भी मिले।