भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को मध्य प्रदेश से चुनाव लड़ाने का कोई प्रस्ताव प्रदेश चुनाव समिति ने तो केंद्रीय चुनाव समिति को नहीं भेजा है, लेकिन भोपाल से सांसद कैलाश जोशी का कहना है कि उन्होंने आडवाणी को भोपाल से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था।
जल्द ही उनके नाम की घोषणा हो सकती है। कैलाश जोशी ने प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में भी कहा था कि यहां से परंपरागत रूप से बड़े नेता चुनाव लड़ते रहे हैं, इसलिए आडवाणी जी को चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।
कैलाश जोशी का यू-टर्न
अलबत्ता भोपाल से मौजूदा सांसद कैलाश जोशी ने प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में लालकृष्ण आडवाणी को भोपाल से चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा था। बाद में कैलाश जोशी इस प्रस्ताव की पुष्टि करने से भी पलट गए थे।
भाजपा संगठन में कोई भी आडवाणी के भोपाल से चुनाव लड़ने की पुष्टि नहीं कर रहा है। मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होने वाली है, जिसमें इस बात का खुलासा हो जाएगा।
मध्य प्रदेश भाजपा ने दिया न्योता
पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में कैलाश जोशी ने तर्क दिया था कि भोपाल सीट से परंपरागत रूप से उमा भारती और उनके जैसे वरिष्ठ नेता चुनाव लड़ते रहे हैं, इसलिए किसी वरिष्ठ नेता को यहां से चुनाव लड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा था कि लालकृष्ण आडवाणी को भोपाल से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित करना चाहिए। उस समय चुनाव समिति की बैठक में अन्य सदस्य उनके इस प्रस्ताव से हतप्रभ रह गए थे।
सुषमा स्वराज लड़ रही हैं विदिशा से
कई सदस्यों ने यह तो कहा कि किसी प्रमुख केंद्रीय नेता के मध्य प्रदेश आकर चुनाव लड़ने में कोई बुराई नहीं है। लोकसभा में अच्छे नेताओं को चुनकर जाना चाहिए। सुषमा स्वराज पहले ही विदिशा से चुनाव लड़ रही हैं।
लेकिन कई नेता अंदरखाने में मानते हैं कि पार्टी का नेतृत्व पहले ही कैलाश जोशी की ठसकबाजी से तंग रहा है। वे कई बार गुस्से में बैठके छोड़कर चले जाते थे। विधानसभा चुनाव के समय तो कैलाश जोशी प्रदेश भाजपा कार्यालय के बाहर जाकर कुर्सी पर बैठ गए थे।
उमा भारती को रखा भोपाल से दूर
उमा भारती को भी भोपाल से दूर रखा गया है। उन्हें पार्टी ने झांसी से चुनाव मैदान में उतारा है। अपेक्षाकृत सुरक्षित समझे जाने वाली भोपाल सीट से आलोक शर्मा के नाम का प्रस्ताव प्रदेश चुनाव समिति ने किया है।
राज्य के गृहमंत्री बाबूलाल गौर भी अपनी बहू कृष्णा गौर के लिए दावा ठोकते रहे हैं, जिसके समर्थन में प्रदेश नेतृत्व में कम ही लोग दिखाई देते हैं। अब देखना है कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति क्या करवट लेती है।