मध्यप्रदेश में अचानक बदले मौसम के चलते पहले ही कोहरे से परेशान किसानों पर अब बे मौसम हुई बारिश की मार पड़ी है, जिससे उनकी कमर टूटने लगी है। पीड़ित किसान अपनी फसल को लेकर अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। अधिकारी भी किसानों को सर्वे का भरोसा दिला रहे हैं, हालांकि हकीकत इसके ठीक उलट है। अधिकारी कहते हैं कि हमने जमीन पर सर्वे की टीम भेजी है, लेकिन शहर से बाहर मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर ही किसानों के खेत में सर्वे का कार्य नहीं हुआ है।
खंडवा सहित पूरे निमाड़ में बीते दिनों में हुई बेमौसम बारिश और कड़ाके की ठंड पड़ने की वजह से इस बार गेहूं और चने की फसल को काफी नुकसान हुआ है। एक ओर घने कोहरे के चलते गेहूं का दाना बारीक पड़ गया है, तो वहीं अब रही-सही कसर बारिश ने पूरी कर दी। बेमौसम बारिश होने से किसानों की खेतों में बची हुई फसल अब आड़ी पड़ चुकी है। इतना ही नहीं, कुछ क्षेत्रों में तो ओले भी पड़े हैं। इस ओलावृष्टि के साथ ही किसानों की उम्मीद भी अब ठंडी पड़ चुकी है। हालांकि, पीड़ित किसान अब भी शासन-प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं।
पिछले दिनों खंडवा के ही मालगांव में रहने वाले एक किसान जगदीश जनसुनवाई मे कोहरे से खराब हुई फसल को लेकर कलेक्टर के सामने पहुंचे थे और उन्हें कर्ज माफ करने की दुहाई देने लगे थे। पीड़ित किसान जगदीश के दर्द की इंतहा तब हुई जब मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनका कर्ज माफ नहीं हुआ तो फिर वे घातक कदम उठा लेंगे। ऐसा नहीं है कि वे पहली बार जनसुनवाई में पहुंचे थे। इससे पहले भी वह जनसुनवाई में पहूंच कर अपना दुखड़ा सुना चुके थे। आश्वासन देकर उन्हें चलता कर दिया गया था।बावजूद इसके अब तक भी उनके खेत का सर्वे नहीं हुआ है ।
इस मामले में जिला कृषि अधिकारी कैलाश वास्केल ने बताया कि कोहरे और बेमौसम बारिश के बाद उनकी टीम फील्ड में पहुंच गई है। सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि, जिले के अधिकारी कितना सच बोल रहे हैं, यह तो खंडवा से मात्र 5 किलोमीटर दूर एक खेत में आड़ी पड़ी फसल को लेकर उदास बैठे किसान को देखकर ही समझ आ रहा था। जब इस पीड़ित किसान से पूछा गया कि उनकी खराब हुई फसल का सर्वे करने कोई अधिकारी क्या उनके खेत पर पहुंचा है, तो उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया।
किसान संगठन के जय पटेल ने बताया कि उन्हें भी आस है कि किसानों खराब हुई खेती का सर्वे तो जरूर होगा। उनकी खराब फसलों का मुआवजा भी मिलेगा। उनके संगठन ने भी सरकार से मांग की है कि जल्दी सर्वे का कार्य पूरा कराया जाए और किसानों की खराब हुई फसलों का मुआवजा और बीमा समय पर दिया जाए। अन्यथा किसान भी आंदोलन की राह पर निकल सकते हैं।
उज्जैन में कांग्रेस विधायक ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
बेमौसम ओलावृष्टि एवं आंधी के साथ हुई बारिश ने फसलों को बर्बाद करके रख दिया। तराना विधायक महेश परमार ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में उज्जैन जिले एवं तराना विधानसभा क्षेत्र में खराब हो चुकी फसलों का सर्वे कराकर राहत राशि एवं बीमा राशि स्वीकृत करने की मांग की। विधायक महेश परमार ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र तराना के साथ ही उज्जैन जिले में ओलावृष्टि एवं आंधी के कारण गेहूं, चना, रायडा, मसूर, धनिया व अन्य फसलें बरबाद हो गई है। दिसम्बर व जनवरी में कोहरा व धुंध ने भी फसलों को नुकसान पहुंचाया था। फसल की कटाई चल रही है, लेकिन शासन द्वारा अभी तक क्रॉप कटिंग तक शुरू नहीं की गई है।