खंडवा जिले में आदिवासियों की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर बनाए गए मसाया सोलर प्लांट पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता के आदेश पर प्लांट को सील कर दिया गया है और इसके संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
यह कार्रवाई इंदौर कमिश्नर को मिली शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें आरोप था कि आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर प्लांट स्थापित किया गया है। इस शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने संयुक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जांच दल गठित किया। जांच में सामने आया कि धरमपुरी, कनवानी, भावसिंगपुरा, बड़गांव माली और सिवना गांवों में बड़ी संख्या में आदिवासियों की जमीनों पर प्लांट स्थापित किया गया है। कलेक्टर गुप्ता ने बताया कि कंपनी ने बिना वैधानिक अनुमति लिए आदिवासी किसानों की जमीनों पर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया था। जांच में यह भी सामने आया कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों की जमीनों का दबाव और धोखाधड़ी से अधिग्रहण किया गया। कई मामलों में बिना पर्याप्त मुआवजे और बिना वैध प्रक्रिया के जमीनों का अंतरण हुआ है, जो मप्र भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन है।
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जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने बिना लीज या अधिग्रहण के लगभग 27.64 हेक्टेयर शासकीय जमीन, जिनमें चरनोई, नाला, सड़क और जंगल की जमीनें शामिल हैं, पर भी कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में बिना नामांतरण के, केवल कब्जे के आधार पर भूमि का औद्योगिक उपयोग के लिए डायवर्जन भी कराया गया।
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कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जब तक कंपनी सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं करती— जिसमें आदिवासी जमीनों के वैध अंतरण की अनुमति और शासकीय जमीन पर लीज की कार्रवाई शामिल है, तब तक प्लांट का संचालन पूरी तरह से बंद रहेगा। एसडीएम बजरंग बहादुर ने प्लांट कार्यालय को सील कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने कहा कि इस पूरे मामले में लिप्त रहे तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की उच्च स्तरीय जांच भी की जाएगी।