पवित्र श्रावण मास चालू है, और इस वर्ष श्रावण में छह सोमावर आने हैं। इनमें प्रत्येक सोमवार को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के धार्मिक और पार्वती तीर्थंकर ओंकारेश्वर में उत्सवपूर्वक मनाया जाना है। इस दिन बाबा ओंकार नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इसी के चलते श्रावण मास के प्रथम सोमवार को ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर जी सजी हुई पालकी में सवार होकर, ढोल धमाकों के साथ नगर भृमण पर प्रजा का हाल जानने निकले। दूसरी ओर तीर्थ नगरी के दक्षिण तट पर ममलेश्वर भगवान भी अपनी शाही पालकी में सवार होकर निकले। इस दौरान भगवान की शाही सवारी धूमधाम से कोटितीर्थ घाट पर पहुंची। जहां घाट पर विद्वान पंडितों द्वारा वेद मंत्रों के साथ पूजा-अर्चना की गई। साथ ही इस दौरान पंचामृत और मां नर्मदा के पवित्र जल से भी ज्योतिर्लिंग भगवान की पूजा पंडितों द्वारा की गई। इसके बाद महाआरती का आयोजन हुआ।
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महाआरती के बाद दोनों पालकियों को नर्मदाजी के पवित्र जल में नौका विहार कराया गया। जहां से दोनों पालकियां गौ मुख घाट पर उतरकर आगे बढ़ीं। इस दौरान पूरे मार्ग में भक्त लोग भोले शंभू, भोलेनाथ का उद्घोष करते हुए आगे आगे चल रहे थे। बता दें कि, इस वर्ष पालकियों का रूट परिवर्तन किया गया है, और काशी विश्वनाथ होते हुए, बलवाड़ी से पुराने बस स्टैंड और मुख्य बाजार से होकर जेपी चौक से पालकियों को लाया गया है। पूर्व में पालकियों को सीढ़ियां चढ़कर खेड़ा जी की दुकान के सामने से ले जाया जाता था, लेकिन उत्सव पूर्व हुई मीटिंग के दौरान जनप्रतिनिधियों ने इस वर्ष से मार्ग परिवर्तित करने की मांग रखी थी। इस पर एसडीएम पुनासा शिवम प्रजापति ने इस मांग को स्वीकार करते हुए, प्रथम सोमवार की पालकी काशी विश्वनाथ से हाट बाजार, बलवाड़ी और पुराने बस स्टैंड से होते हुए, मुख्य मार्ग से जेपी चौक तक का रूट तय कर दिया। वहीं जेपी चौक से पुराने पुल को पार कर मार्केट से होते हुए भगवान की पालकी रात्रि 10 बजे शयन आरती के समय मंदिर पहुंचेंगी।
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पालकियों के मार्ग में ढोलकों की थाप पर भक्त जमकर नाच रहे थे। हजारों भक्त भगवान के दर्शन करने पूरे रास्ते भर पलक पावड़े बिछाए मार्ग पर ही खड़े थे। पालकी के साथ भी हजारों भक्त आनंद लेते हुए साथ चल रहे थे। इस दौरान मार्ग में जगह-जगह गुलाल और गुलाब की पंखुड़ी उड़ाकर भक्त भगवान का स्वागत कर रहे थे। साथ ही कपूर आरती कर भगवान का अभिवादन किया जा रहा था। वहीं प्रशासन ने भी पुख्ता सुरक्षा प्रबंध किए थे। पालकी के साथ भी पुलिस बल विशेष रूप लगाया गया था। पालकी के साथ कुल 51 ढोल साथ थे। वहीं वरिष्ठ अधिकारी पूरी व्यवस्था पर नजर बनाए रखे हुए थे।
नगर भृमण से पहले बाबा का पूजन किया गया।
दोनों पालकियों को नर्मदाजी के पवित्र जल में नौका विहार कराया गया
नगर भृमण के लिए निकले ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकार जी एवं ममलेश्वर जी
नगर भृमण के लिए निकले ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकार जी एवं ममलेश्वर जी
नगर भृमण के लिए निकले ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकार जी एवं ममलेश्वर जी